मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुनील बालकृष्ण शुक्रे ने महाराष्ट्र के नए लोकायुक्त के रूप में पदभार संभाल लिया है। 25 अगस्त को मुंबई स्थित राजभवन में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनका कार्यकाल पांच वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, रहेगा।
न्यायिक करियर रहा लंबा
जस्टिस शुक्रे का जन्म 25 अक्टूबर 1961 को हुआ। उन्होंने 1980 में पुणे विश्वविद्यालय से स्नातक और 1983 में अमरावती के डॉ. पंजाबराव देशमुख लॉ कॉलेज से विधि की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से संवैधानिक कानून में परास्नातक किया। वर्ष 2000 में वे सीधे जिला न्यायाधीश के रूप में न्यायपालिका में आए।
उन्होंने कोल्हापुर के प्रधान जिला न्यायाधीश, बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में प्रशासनिक रजिस्ट्रार, महाराष्ट्र न्यायिक अकादमी के संयुक्त निदेशक और नागपुर के प्रधान जिला न्यायाधीश जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। 2011 में उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल का पद संभाला और 13 मई 2013 को हाई कोर्ट के न्यायाधीश बने। अक्टूबर 2023 में वे सेवानिवृत्त हुए।
मराठा आरक्षण मामले में भी महत्वपूर्ण भूमिका
सेवानिवृत्ति के बाद दिसंबर 2023 में उन्हें महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। आयोग के अध्यक्ष के तौर पर उनकी भूमिका मराठा आरक्षण से जुड़े घटनाक्रम में महत्वपूर्ण रही। उनकी रिपोर्ट ने मराठा समुदाय के आरक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
अब महाराष्ट्र की वैधानिक भ्रष्टाचार-रोधी संस्था के प्रमुख के रूप में उनके सामने प्रशासन में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की प्रभावी सुनवाई और जवाबदेही मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
खास बात यह है कि उन्हें न्यायपालिका और प्रशासन—दोनों क्षेत्रों का लंबा अनुभव है। इसलिए महाराष्ट्र लोकायुक्त की कार्यप्रणाली में उनकी नियुक्ति को पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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