ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और सामरिक तैयारियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हुई है। इसी क्रम में आने वाले दो महीनों में भारतीय वायुसेना विभिन्न मित्र देशों के साथ संयुक्त हवाई अभ्यास में भाग लेने जा रही है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार इन अभ्यासों का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना, आधुनिक युद्ध कौशल का आदान-प्रदान करना और संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत करना है। इस दौरान भारतीय लड़ाकू विमान और वायुसेना के दल अपनी परिचालन दक्षता का प्रदर्शन भी करेंगे।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संयुक्त अभ्यास पायलटों को अलग-अलग परिस्थितियों में प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही आधुनिक रणनीतियों, हवाई संचालन और तकनीकी अनुभवों के आदान-प्रदान से भविष्य की चुनौतियों से निपटने की क्षमता भी मजबूत होती है।
भारत पिछले कुछ वर्षों में अनेक मित्र देशों के साथ नियमित सैन्य अभ्यास करता रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग बढ़ाने, पारस्परिक विश्वास मजबूत करने और सामरिक साझेदारी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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