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गैंगस्टर सतीश भाऊ के करीबी पर नए आरोप, साइबर सेल जांच में कई गंभीर पहलुओं की पड़ताल

 

ब्लैकमेलिंग, आर्म्स एक्ट और सोशल मीडिया गतिविधियों सहित कई मामलों में पहले से दर्ज हैं प्रकरण

प्रणव बजाज


इंदौर के चर्चित गैंगस्टर सतीश भाऊ से जुड़े मामले में एक बार फिर नया मोड़ सामने आया है। जेल में बंद हिस्ट्रीशीटर हितेश प्रधान पर पहले से दर्ज ब्लैकमेलिंग, प्राणघातक हमले और आर्म्स एक्ट के मामलों के साथ अब साइबर सेल भी कुछ शिकायतों की जांच कर रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हितेश पर कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और उसके सोशल मीडिया अकाउंट की गतिविधियां भी जांच के दायरे में हैं।



55 लाख की ब्लैकमेलिंग का आरोप


पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हितेश प्रधान के खिलाफ पहले ब्लैकमेलिंग का मामला दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उससे लाखों रुपये की मांग की गई। मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस प्रकरण के कुछ पहलुओं की जांच साइबर सेल द्वारा भी की जा रही है।


आर्म्स एक्ट और अन्य मामलों में पहले हो चुकी कार्रवाई


पुलिस के अनुसार हितेश प्रधान के खिलाफ आर्म्स एक्ट, प्राणघातक हमले और अन्य गंभीर धाराओं में भी प्रकरण दर्ज हैं। इन्हीं मामलों में उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। पुलिस का कहना है कि उसके आपराधिक रिकॉर्ड और विभिन्न मामलों की विवेचना अलग-अलग स्तर पर जारी है।


सोशल मीडिया गतिविधियां भी जांच के घेरे में


जांच एजेंसियां हितेश के सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए वीडियो और पोस्ट की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि इनका किसी आपराधिक गतिविधि या कानून के उल्लंघन से कोई संबंध है या नहीं।


बाउंड ओवर की कार्रवाई भी हुई


पुलिस अधिकारियों के अनुसार हितेश प्रधान के खिलाफ पूर्व में शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से बाउंड ओवर की कार्रवाई भी की जा चुकी है। यदि भविष्य में किसी नए अपराध में संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


पुलिस का कहना


पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जिन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य मिलेंगे, उनमें कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

नोट: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों और पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज आरोपों एवं कार्रवाई के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों का अंतिम सत्यापन न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन है।

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