पूर्व आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने ईओडब्ल्यू को सौंपा ‘शिव-राज’ मामा के भ्रष्टाचार का पोथा ?


प्रणव बजाज

40 से अधिक मामलों की जांच की मांग, करीब 57 पन्नों के दस्तावेज सौंपे जाने का दावा; बिजली, खनन, पोषण आहार से लेकर नेहरू अर्बन परियोजना तक के मामले शिकायत में शामिल होने की बात



भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। पूर्व आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने कथित भ्रष्टाचार से जुड़े 40 से अधिक मामलों की जांच की मांग करते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में शिकायत दिए जाने का दावा किया है।


डबास के अनुसार, उन्होंने 2 अगस्त 2026 को भोपाल स्थित आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के कार्यालय पहुंचकर महानिदेशक को शिकायत सौंपी। शिकायत के साथ करीब 57 पन्नों के दस्तावेज और परिशिष्ट भी दिए जाने की बात कही गई है।


17 वर्ष के शासनकाल से जुड़े मामलों की जांच की मांग


डबास ने आरोप लगाया है कि शिकायत में शिवराज सिंह चौहान के लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सामने आए विभिन्न मामलों को शामिल किया गया है। इनमें बिजली खरीदी, पोषण आहार, डंपर मामला, खनन तथा नेहरू अर्बन परियोजना सहित कई विषयों का उल्लेख होने का दावा है।


हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन मामलों में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय मानना उचित नहीं होगा। आरोपों की वास्तविकता दस्तावेजों, सरकारी अभिलेखों, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।


परिवार की जमीन और कंपनियां भी सवालों के घेरे में


डबास ने कथित तौर पर शिवराज सिंह चौहान के परिवार से जुड़ी जमीनों और कंपनियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में इन संपत्तियों और व्यावसायिक गतिविधियों की जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई है।


यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी सार्वजनिक व्यक्ति या उसके परिवार से जुड़ी संपत्ति को लेकर सवाल उठना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है। इसके लिए स्वामित्व, खरीद का स्रोत, लेन-देन, आय के ज्ञात स्रोत और संबंधित कानूनी अभिलेखों की जांच जरूरी होगी।


बिजली से खनन तक लंबी सूची


डबास की शिकायत में जिन प्रमुख विषयों का उल्लेख होने की बात कही जा रही है, उनमें—


- बिजली खरीदी से जुड़े आरोप

- पोषण आहार से जुड़े मामले

- डंपर प्रकरण

- खनन से संबंधित मामले

- नेहरू अर्बन परियोजना

- जमीन और संपत्ति से जुड़े सवाल

- कंपनियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोप


शामिल बताए जा रहे हैं।


इनमें से कई विषय मध्यप्रदेश की राजनीति में पहले भी विवाद और सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं। डबास स्वयं पिछले कई वर्षों से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे उठाते रहे हैं। वर्ष 2025 में भी उन्होंने शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ वन भूमि और आदिवासी अधिकारों से संबंधित शिकायतें की थीं, जिन पर जांच की मांग की गई थी।


बाईपास जमीन मामले में भी उठा चुके हैं सवाल


मई 2026 में डबास के नेतृत्व वाले सिस्टम परिवर्तन अभियान ने भोपाल के प्रस्तावित पश्चिमी बाईपास से जुड़े जमीन सौदों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। आरोप लगाया गया था कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने परियोजना की मंजूरी से पहले आसपास जमीन खरीदी और बाद में उसके मूल्य में भारी वृद्धि हुई। इस मामले में मुख्यमंत्री को शिकायत दिए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई थी।


अब नजर ईओडब्ल्यू की अगली कार्रवाई पर


शिवराज सिंह चौहान के लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल से जुड़े 40 से अधिक मामलों की जांच की मांग वाली कथित शिकायत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।


क्या शिकायत में लगाए गए आरोपों पर प्राथमिक जांच होगी?


क्या संबंधित विभागों से मूल अभिलेख मंगाए जाएंगे?


क्या संपत्तियों और कंपनियों से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की जांच होगी?


और क्या शिकायत में लगाए गए आरोपों में प्रथमदृष्टया कोई आपराधिक मामला बनता है?


फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे।


महत्वपूर्ण: डबास द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध नहीं है और केवल शिकायत के आधार पर शिवराज सिंह चौहान या उनके परिवार को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। यदि आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जांच शुरू करता है तो उसके निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्य ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे।

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