Top News

संकट कितना भी बड़ा हो, गणेशजी का यह स्तोत्र देता है मन को संबल

 


हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना गया है। इन्हीं की उपासना से जुड़ा संकटनाशन गणेश स्तोत्र भक्तों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। परंपरा के अनुसार यह स्तोत्र नारद पुराण से संबद्ध है और इसमें भगवान गणेश के 12 नामों का स्मरण किया जाता है। 



स्तोत्र में वक्रतुण्ड, एकदंत, कृष्णपिंगाक्ष, गजवक्त्र, लंबोदर, विकट, विघ्नराज, धूम्रवर्ण, भालचंद्र, विनायक, गणपति और गजानन जैसे नाम आते हैं। इसके अंतिम श्लोकों में नियमित पाठ से विद्या, धन और अन्य मनोकामनाओं की प्राप्ति तथा विघ्नों के भय से मुक्ति की धार्मिक मान्यता बताई गई है। 


कैसे करें पाठ?


सुबह स्नान आदि के बाद शांत स्थान पर भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठकर श्रद्धापूर्वक पाठ किया जा सकता है। पारंपरिक विवरण में इसका पाठ प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल करने का उल्लेख मिलता है। 


कई धार्मिक परंपराओं में इसे लगातार 40 दिनों तक नियमित रूप से करने की सलाह दी जाती है। हालांकि 40 दिन का यह नियम स्तोत्र के मूल श्लोक में निर्धारित नहीं है; यह बाद की प्रचलित साधना-विधियों में मिलता है। 


सबसे जरूरी बात है श्रद्धा, नियमितता और सकारात्मक मन से पाठ करना। धार्मिक मान्यताओं में इसे संकटों से मुक्ति का साधन माना गया है, जबकि व्यावहारिक रूप से नियमित प्रार्थना और ध्यान मन को शांति, धैर्य और कठिन परिस्थितियों से निपटने का संबल दे सकते हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post