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गुराड़ी घाट जमीन कांड: 50 नौकरशाहों की खरीद, 16 महीने बाद 3200 करोड़ का बायपास

 

जमीन पहले, बायपास बाद में—संयोग या सूचना का खेल? .

प्रणव बजाज


भोपाल। कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट में करीब 50 आईएएस-आईपीएस अधिकारियों और उनसे जुड़े लोगों द्वारा एक ही दिन कृषि भूमि खरीदे जाने का मामला अब जांच की मांग तक पहुंच गया है। सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएफएस आजाद सिंह डबास ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के महानिदेशक उपेन्द्र जैन को शिकायत देकर जमीन खरीद से लेकर बायपास की मंजूरी और लैंड यूज परिवर्तन तक पूरी कड़ी की जांच तथा दोषी पाए जाने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।



शिकायत के अनुसार 4 अप्रैल 2022 को करीब 2.023 हेक्टेयर यानी लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि की रजिस्ट्री एक ही दस्तावेज में 50 हिस्सों के रूप में हुई। वास्तविक खरीदारों की संख्या 41 बताई गई है। जमीन की रजिस्ट्री कीमत करीब ₹5.50 करोड़, जबकि बाजार मूल्य करीब ₹7.78 करोड़ बताया गया। इसके करीब 16 महीने बाद 31 अगस्त 2023 को करीब ₹3200 करोड़ लागत वाले 35 किलोमीटर लंबे वेस्टर्न बायपास को मंजूरी मिली। उपलब्ध रिपोर्टों में खरीदी गई जमीन से प्रस्तावित मार्ग की दूरी करीब 500 मीटर बताई गई है।


शिकायत में यह भी कहा गया है कि जून 2024 में जमीन का लैंड यूज कृषि से आवासीय किया गया। रिपोर्टों के अनुसार करीब ₹81.75 प्रति वर्गफुट की दर वाली जमीन का मूल्य आवासीय उपयोग के बाद करीब ₹557 प्रति वर्गफुट बताया गया। वर्तमान बाजार दर ₹2500 से ₹3000 प्रति वर्गफुट होने के आधार पर इसकी संभावित कीमत ₹55 से ₹60 करोड़ या उससे अधिक होने का दावा किया गया है।


जिन अधिकारियों के नाम रिपोर्टों में सामने आए


प्रकाशित रिपोर्टों में प्रवीण सिंह अडायच, निशीथ मिश्रा, जयति सिंह, यांगचे डोलकर भूटिया, मयंक अग्रवाल, रजनी सिंह, साकेत मालवीय, अंशुल गुप्ता, अंशु सिंगला और चाहत बाजपेयी के नाम शामिल हैं। इनके अलावा शैलेश कुमार जाखोटिया का नाम भी सामने आया है, जिन्हें भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा से संबंधित अधिकारी बताया गया है।


रिपोर्टों में दीप कोयल, रितु जैन और आकांक्षा तिवारी जैसे परिजनों/अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम भी बताए गए हैं। हालांकि सभी 50 खरीदारों की पूरी सूची और प्रत्येक व्यक्ति की जमीन से संबंधित भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। किसी नाम का रिपोर्ट में आना अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है।


जांच में क्या सामने आना चाहिए?


ईओडब्ल्यू से मांग की गई है कि जमीन के वास्तविक खरीदार, भुगतान का स्रोत, रजिस्ट्री दस्तावेज, अधिकारियों एवं परिजनों के नाम संपत्तियां, लैंड यूज परिवर्तन, बायपास की मूल परियोजना, मंजूरी, मार्ग के नक्शे में हुए बदलाव और निर्णय लेने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए।


खास सवाल यह है कि क्या जमीन खरीदने वालों को बायपास की संभावित दिशा की जानकारी पहले से थी, या जमीन खरीद और बाद के घटनाक्रम महज संयोग हैं? जिला भोपाल की आधिकारिक वेबसाइट पर फरवरी 2026 के भू-अर्जन दस्तावेज में गुराड़ी घाट सहित नौ गांवों को पश्चिम भोपाल बायपास फोरलेन के भू-अर्जन क्षेत्र में शामिल किया गया है।


अब निगाह ईओडब्ल्यू जांच पर है—क्योंकि इस मामले में जमीन की रजिस्ट्री से लेकर बायपास की फाइल तक हर कड़ी की निष्पक्ष पड़ताल ही असली तस्वीर सामने ला सकती है।

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