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खाकी में कुर्सी संग्राम! 32 नए आईपीएस पदों की तैयारी, अगस्त में बदलेगी पुलिस नौकरशाहों की तस्वीर

 226 अफसरों के भरोसे चल रही व्यवस्था, रिटायरमेंट और तबादलों से खुलेंगी नई कुर्सियां

प्रणव बजाज | बौद्धिक प्रतिकार 

मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में बड़े प्रशासनिक बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) कैडर में 32 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। यह प्रस्ताव जल्द गृह विभाग के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। यदि मंजूरी मिलती है, तो वर्षों से अटकी पदोन्नतियों का रास्ता खुलेगा और पुलिस नेतृत्व का ढांचा बदलेगा।



सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि प्रदेश में 319 स्वीकृत आईपीएस पद हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 226 अधिकारियों से पूरा पुलिस प्रशासन चलाया जा रहा है। यानी लगभग 93 पद खाली हैं। इनमें भी 20 से अधिक अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन, परिवहन विभाग और खेल एवं युवक कल्याण विभाग जैसे संस्थानों में तैनात हैं। इसका सीधा असर जिलों और फील्ड पोस्टिंग पर पड़ रहा है।


रिटायरमेंट से होगा बड़ा फेरबदल


अगस्त माह पुलिस महकमे के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। हाल ही में आईजी अरविंद सक्सेना और डीआईजी शशिकांत शुक्ला सेवानिवृत्त हो चुके हैं।


अगस्त में जिन वरिष्ठ अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने की संभावना है—


डीजी अजय कुमार शर्मा


स्पेशल डीजी आशुतोष राय


एडीजी (इंटेलिजेंस) ए. साईं मनोहर


आईजी, सागर रेंज मिथलेश शुक्ला



इन सेवानिवृत्तियों के बाद पुलिस मुख्यालय से लेकर फील्ड तक बड़े पैमाने पर नई पदस्थापनाएं और तबादले होने की संभावना है।


10 राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों को मिल सकता है आईपीएस का मौका


यदि केंद्र सरकार प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो नए सृजित पदों में 33 प्रतिशत पद राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) से पदोन्नत होकर आईपीएस बनने वाले अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे। इससे लगभग 10 अधिकारियों को आईपीएस कैडर में आने का अवसर मिल सकता है। साथ ही एसपी, डीआईजी, आईजी, एडीजी और डीजी स्तर पर लंबे समय से रुकी पदोन्नतियां भी आगे बढ़ सकेंगी।


नौ साल पीछे चल रहा कैडर रिव्यू


नियमों के अनुसार आईपीएस कैडर रिव्यू हर पांच वर्ष में होना चाहिए, लेकिन मध्य प्रदेश में यह प्रक्रिया लगातार विलंबित रही।


2003 के बाद पहला रिव्यू – 2010


दूसरा – 2015


तीसरा – 2022



यानी पूरी प्रक्रिया लगभग नौ वर्ष पीछे चल रही है। अब 2027 कैडर रिव्यू को ध्यान में रखते हुए पीएचक्यू ने समय से पहले तैयारी शुरू कर दी है।


बौद्धिक प्रतिकार की पड़ताल


93 आईपीएस पद वर्षों से खाली क्यों हैं?


क्या पुलिस नेतृत्व की कमी का असर कानून-व्यवस्था पर पड़ रहा है?


केंद्र इस बार 32 पदों को मंजूरी देगा या पिछली बार की तरह संख्या घटा देगा?


क्या अगस्त के अंत तक बड़ी तबादला सूची जारी होगी?


क्या पदोन्नतियां योग्यता के आधार पर होंगी या फिर एक बार राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान हावी रहेगी?



सबसे बड़ा सवाल


जब 319 स्वीकृत पदों में से केवल 226 आईपीएस अधिकारी ही मैदान में हैं, तो प्रदेश की बढ़ती आबादी, साइबर अपराध और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस नेतृत्व कितना पर्याप्त है?


अगस्त का महीना मध्य प्रदेश पुलिस महकमे के लिए निर्णायक माना जा रहा है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार की मंजूरी और उसके बाद आने वाली तबादला सूची पर टिकी है।

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