नई दिल्ली।
ने वैश्विक सैन्य विमानन क्षमता की ताज़ा रैंकिंग में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए चीन, पाकिस्तान और जापान की वायु सेनाओं से बेहतर स्थान प्राप्त किया है। यह आकलन विभिन्न देशों की वायु शक्ति, आधुनिक लड़ाकू विमानों, संचालन क्षमता, प्रशिक्षण और सामरिक तैयारी जैसे कई मानकों के आधार पर किया गया है।
रैंकिंग तैयार करने वाली संस्था वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट (WDMMA) दुनिया के 103 देशों की 129 सैन्य वायु इकाइयों और लगभग 48,082 सैन्य विमानों का विश्लेषण करती है। संस्था केवल विमानों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी युद्ध क्षमता, तकनीकी स्तर, बेड़े की विविधता, आधुनिकीकरण और संचालन दक्षता जैसे अनेक मानकों का भी मूल्यांकन करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय वायुसेना की यह उपलब्धि लगातार हो रहे आधुनिकीकरण, उन्नत लड़ाकू विमानों के शामिल होने, बेहतर प्रशिक्षण और बढ़ी हुई परिचालन क्षमता का परिणाम मानी जा रही है। हालांकि, अलग-अलग वैश्विक संस्थानों की रैंकिंग के मानदंड अलग हो सकते हैं, इसलिए इन्हें एक संकेतक के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी वास्तविक युद्ध क्षमता का अंतिम प्रमाण।
यह उपलब्धि भारत की रक्षा तैयारियों और वायु शक्ति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली एक महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में देखी जा रही है।

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