पाकिस्तान के कराची में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर की बरसी के अवसर पर कट्टरपंथी और भारत विरोधी तत्वों के एकत्र होने की खबरें सामने आई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस बैठक में भारत विरोधी प्रचार, जम्मू-कश्मीर में युवाओं को भड़काने और आतंकी नेटवर्क को सक्रिय रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
रिपोर्टों के मुताबिक बैठक में पाकिस्तान में सक्रिय कई कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। भारत की सुरक्षा एजेंसियां ऐसे आयोजनों पर लगातार नजर रखती हैं, क्योंकि अतीत में इस प्रकार की सभाओं के बाद घुसपैठ, आतंकवादी गतिविधियों और दुष्प्रचार अभियानों में तेजी देखी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल समर्थकों का मनोबल बढ़ाना ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करना और युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश भी होता है। हालांकि भारत की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत मानी जा रही है और सीमा पर निगरानी लगातार बढ़ाई गई है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की शून्य सहिष्णुता नीति के कारण आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर लगातार दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद सीमा पार बैठे आतंकी सरगना समय-समय पर ऐसे आयोजन कर अपने नेटवर्क को सक्रिय रखने की कोशिश करते हैं। भारत की एजेंसियां इन गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सतर्क हैं।

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