दतिया का फैसला ईवीएम में कैद होगा, दिग्गजों की साख दांव पर
विशेष संवाददाता, दतिया
दतिया विधानसभा उपचुनाव का शोर थम चुका है। अब फैसला जनता के हाथ में है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और निर्वाचन आयोग की निगरानी में मतदान कराने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
इस उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व राजपरिवार से जुड़े घनश्याम सिंह पर दांव लगाया है। दोनों दलों ने इसे प्रतिष्ठा का चुनाव बना दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी, उमंग सिंघार सहित कई बड़े नेताओं ने लगातार सभाएं और जनसंपर्क किया।
भाजपा ने पूरे प्रचार के दौरान विकास, सड़क, सिंचाई और सरकारी योजनाओं को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया। दूसरी ओर कांग्रेस ने किसानों की समस्याएं, खाद संकट, फसल नुकसान और ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार को घेरा।
चुनाव के अंतिम दौर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के उस बयान ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए बड़ी मात्रा में नकदी और शराब का इस्तेमाल किया जा सकता है। भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई की मांग की। इस मामले पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया जारी है।
दतिया उपचुनाव का परिणाम सरकार बनाने या गिराने वाला नहीं है, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश पूरे मध्य प्रदेश में जाएगा। इसलिए दोनों दलों ने अपनी पूरी ताकत इस सीट पर झोंक दी है। अब सभी की निगाहें मतदान प्रतिशत और 3 अगस्त को आने वाले परिणाम पर टिकी हैं।

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