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इंदौर का पानी किसके भरोसे? बिना मीटर लाखों लीटर भूजल निकासी, टैंकर कारोबार पर उठे बड़े सवाल

 


प्रणव बजाज

इंदौर को स्वच्छ और आधुनिक शहर बनाने के दावों के बीच भूजल दोहन का एक गंभीर मुद्दा सामने आ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शहर में अनेक निजी और व्यावसायिक बोरवेलों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में भूजल निकाला जा रहा है। आरोप यह भी हैं कि कई स्थानों पर इस पानी की आपूर्ति टैंकरों के माध्यम से की जा रही है, जबकि पानी की निकासी की मात्रा मापने के लिए जल मीटर नहीं लगे हैं।


यदि बड़े पैमाने पर भूजल निकासी बिना प्रभावी निगरानी के हो रही है, तो यह केवल राजस्व का विषय नहीं बल्कि पर्यावरण, जल संरक्षण और भविष्य की जल सुरक्षा का भी प्रश्न है।

उठते बड़े सवाल

शहर में कितने निजी और व्यावसायिक बोरवेल पंजीकृत हैं?

कितने बोरवेलों पर जल निकासी मापने के लिए मीटर लगे हैं?

प्रतिदिन कितना भूजल निकाला जा रहा है और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है?

टैंकरों से बेचे जा रहे पानी का स्रोत, गुणवत्ता और वैधता की निगरानी कौन करता है?

यदि मीटर नहीं हैं, तो निकासी की मात्रा और शुल्क का आकलन कैसे किया जाता है?

टैंकर अर्थव्यवस्था पर सवाल

गर्मी और जल संकट के दौरान टैंकरों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में पारदर्शी व्यवस्था न होने पर अवैध दोहन, अनियमित वसूली और संसाधनों के असमान वितरण जैसी आशंकाएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, किसी भी ठेकेदार या अधिकारी द्वारा अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप तभी स्थापित माने जाएंगे जब उनकी पुष्टि सक्षम जांच या आधिकारिक कार्रवाई से हो।

38 लाख नागरिकों की चिंता

इंदौर जैसे बड़े शहर में जल प्रबंधन सीधे लाखों नागरिकों के जीवन से जुड़ा विषय है। यदि भूजल का दोहन उसकी पुनर्भरण क्षमता से अधिक होता है, तो भविष्य में जलस्तर गिरने, बोरवेल सूखने और पेयजल संकट गहराने का खतरा बढ़ सकता है।

क्या होना चाहिए?

सभी व्यावसायिक बोरवेलों पर अनिवार्य डिजिटल जल मीटर।

टैंकरों के जल स्रोत और आपूर्ति का सार्वजनिक डिजिटल रिकॉर्ड।

भूजल निकासी का नियमित स्वतंत्र लेखा-परीक्षण।

जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को सख्ती से लागू करना।

नियमों के उल्लंघन पर पारदर्शी जांच और आवश्यक कार्रवाई।

निष्कर्ष

इंदौर के भूजल प्रबंधन को लेकर उठ रहे प्रश्नों का उत्तर केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि पारदर्शी आंकड़ों, प्रभावी निगरानी और जवाबदेही से मिल सकता है। यदि वास्तव में बड़े पैमाने पर बिना मीटर भूजल निकासी हो रही है, तो इसकी स्वतंत्र जांच और सार्वजनिक जानकारी आवश्यक है, ताकि नागरिकों का विश्वास बना रहे और शहर की जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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