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दिल्ली में जीपीए पर सख्ती, अब बिना कलेक्टर की मंजूरी के संपत्ति हस्तांतरण नहीं

 


 के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने संपत्ति पंजीकरण में राजस्व चोरी, फर्जीवाड़े और भू-माफिया पर अंकुश लगाने के लिए जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) से जुड़े मामलों में सख्त व्यवस्था लागू की है।


नए निर्देशों के अनुसार, रक्त संबंध (ब्लड रिलेशन) से बाहर के व्यक्तियों के पक्ष में किए गए जीपीए के आधार पर संपत्ति पंजीकरण अब सब-रजिस्ट्रार सीधे नहीं करेंगे। ऐसे सभी मामलों को जांच और स्वीकृति के लिए कलेक्टर ऑफ स्टांप के पास भेजा जाएगा। वहां दस्तावेजों की वैधता, स्टांप शुल्क और अन्य कानूनी पहलुओं की जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

दिल्ली सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य फर्जी जीपीए के माध्यम से होने वाले अवैध संपत्ति हस्तांतरण, स्टांप शुल्क की चोरी और भू-माफिया की गतिविधियों पर रोक लगाना है। इससे सरकारी राजस्व की सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की भी बेहतर रक्षा हो सकेगी।

सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संपत्ति पंजीकरण के दौरान नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए और संदिग्ध मामलों में विस्तृत जांच के बाद ही पंजीकरण की अनुमति दी जाए।

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