प्रणव बजाज
भोपाल। मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि से जुड़े 81 हजार उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) समय पर जमा नहीं होने का मामला सामने आया है। यह जानकारी राज्य की 2024-25 वित्तीय रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियों के आधार पर चर्चा में आई है। उपयोगिता प्रमाण-पत्र किसी भी सरकारी राशि के नियमानुसार उपयोग का आधिकारिक प्रमाण होता है। इनके लंबित रहने से वित्तीय जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्न उठते हैं।
क्या है उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी)?
उपयोगिता प्रमाण-पत्र वह दस्तावेज होता है, जिसके माध्यम से संबंधित विभाग यह प्रमाणित करता है कि आवंटित सरकारी धन निर्धारित उद्देश्य पर नियमानुसार खर्च किया गया। यूसी जमा नहीं होने पर व्यय का सत्यापन लंबित रहता है और आगे की वित्तीय स्वीकृतियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट में क्या सामने आया?
रिपोर्ट के अनुसार, लंबित 81 हजार से अधिक उपयोगिता प्रमाण-पत्रों में से लगभग 76 प्रतिशत वर्ष 2024-25 से संबंधित हैं, जबकि शेष पुराने वर्षों के हैं। इन लंबित प्रमाण-पत्रों से जुड़ी राशि करीब 60 हजार करोड़ रुपये बताई गई है।
किन विभागों पर सबसे अधिक लंबित राशि?
रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र इन विभागों से जुड़े हैं—
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग
ग्रामीण विकास विभाग
नगरीय विकास एवं आवास विभाग
खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग
सामाजिक न्याय विभाग पर विशेष टिप्पणी
रिपोर्ट में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की कुछ योजनाओं में उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर प्रस्तुत नहीं किए जाने का उल्लेख है। विभाग ने स्पष्टीकरण में कहा है कि संबंधित प्रमाण-पत्र जिलों से प्राप्त होने के बाद प्रस्तुत किए जाएंगे।
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबे समय तक लंबित रहते हैं, तो नई परियोजनाओं के लिए वित्तीय स्वीकृति, अनुदान जारी होने की प्रक्रिया और योजनाओं की प्रगति प्रभावित हो सकती है। साथ ही वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए समय पर यूसी जमा करना आवश्यक माना जाता है।
निष्कर्ष: यह मामला सरकारी धन के गायब होने का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, बल्कि उपयोगिता प्रमाण-पत्रों के लंबित रहने से जुड़ा वित्तीय और प्रशासनिक विषय है। यदि भविष्य की जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसके आधार पर संबंधित एजेंसियां आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।

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