कर्नाटक की एक यूनिवर्सिटी में परीक्षा और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि यहां 5.30 बजे परीक्षा समाप्त हुई और मात्र 5.35 बजे परिणाम जारी कर दिए गए, जिससे सिर्फ 5 मिनट में कॉपी चेकिंग और मूल्यांकन पर संदेह गहराने लगा है।
जानकारी के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने वर्ष 2022-23 में छठे सेमेस्टर के करीब 41,835 छात्रों का परिणाम लगभग 10 दिनों के भीतर घोषित किया था। इसके बाद 2023-24 और 2024-25 सत्रों में भी परिणाम घोषित करने में 10 से 11 दिनों का समय लगा। लेकिन 2025 के फाइनल वर्ष में अचानक प्रक्रिया बदल गई और महज 1 घंटे के भीतर परिणाम जारी कर दिए गए।
इतनी तेज़ी से रिजल्ट आने के बाद छात्र और शिक्षा जगत में आश्चर्य और संदेह दोनों बढ़ गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कम समय में बड़ी संख्या में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन तकनीकी रूप से लगभग असंभव है, जब तक कि पूरी प्रक्रिया पहले से ऑटोमेटेड या प्री-प्रोसेस्ड न हो।
मामले के सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। छात्र संगठनों ने भी इस पर जवाब मांगा है और मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
फिलहाल यूनिवर्सिटी की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिजल्ट इतनी तेजी से कैसे जारी किया गया और क्या प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई है।

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