भोपाल/ओंकारेश्वर। मध्य प्रदेश के स्टैच्यू ऑफ वननेस को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 108 फीट ऊंची आदि गुरु शंकराचार्य प्रतिमा के मुख्य आंतरिक स्टील पिलर में निर्धारित सीमा से अधिक दबाव और झुकाव सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तकनीकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रतिमा के मुख्य स्टील पिलर पर निर्धारित सीमा से लगभग 24 प्रतिशत अधिक भार पड़ रहा है। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो यह केवल निर्माण गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
बताया जा रहा है कि इस मामले में मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि निर्माण के दौरान स्वीकृत डिज़ाइन, गुणवत्ता मानकों और तकनीकी सुरक्षा नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
अब कई अहम सवाल उठ रहे हैं—
क्या निर्माण से पहले संरचनात्मक सुरक्षा का पर्याप्त परीक्षण किया गया था?
यदि पिलर पर अधिक दबाव था, तो निर्माण एजेंसी और निगरानी अधिकारियों ने इसे कैसे मंजूरी दी?
क्या करोड़ों रुपये की परियोजना में गुणवत्ता नियंत्रण से समझौता हुआ?
यदि तकनीकी खामी सिद्ध होती है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
यह प्रतिमा भारतीय दर्शन और आदि गुरु शंकराचार्य की विरासत का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में यदि निर्माण गुणवत्ता में कोई गंभीर कमी पाई जाती है, तो यह न केवल सार्वजनिक धन के उपयोग बल्कि लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा का भी विषय बन जाएगा।
फिलहाल लोकायुक्त की जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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