मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी हृदय रोग उपचार केंद्रों में शामिल में स्टेंट की कमी ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। अस्पताल में हृदय रोगियों के इलाज के लिए आवश्यक स्टेंट उपलब्ध नहीं होने से कई मरीजों को एंजियोप्लास्टी और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन स्टेंट की उपलब्धता मांग के अनुरूप नहीं है। इसका असर विशेष रूप से उन मरीजों पर पड़ रहा है जिन्हें तत्काल हृदय संबंधी हस्तक्षेप की आवश्यकता है। कई मरीजों और उनके परिजनों को इलाज की तारीख आगे बढ़ने या वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पताल पर बढ़ता दबाव
इंदौर सहित मालवा-निमाड़ क्षेत्र के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचते हैं। निजी अस्पतालों में महंगा इलाज वहन न कर पाने वाले मरीजों के लिए यह संस्थान एक प्रमुख सहारा माना जाता है। ऐसे में स्टेंट की कमी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, गंभीर मरीजों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कुछ मामलों में स्टेंट उपलब्ध होने तक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। इससे मरीजों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
क्या है स्टेंट और क्यों जरूरी है?
स्टेंट एक छोटी जालीदार ट्यूब होती है जिसे हृदय की संकरी या अवरुद्ध धमनियों को खोलने के लिए लगाया जाता है। हार्ट अटैक और गंभीर कोरोनरी आर्टरी रोग के मामलों में समय पर स्टेंट उपलब्ध होना मरीज की जान बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
मरीजों की प्रमुख समस्याएं
एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया में देरी।
गंभीर मरीजों को भी प्रतीक्षा की स्थिति।
निजी अस्पतालों में महंगे इलाज की मजबूरी।
दूर-दराज से आए मरीजों और परिजनों की बढ़ी परेशानी।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव।
प्रशासन से समाधान की उम्मीद
अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग से जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग उठ रही है। मरीजों का कहना है कि प्रदेश के प्रमुख सरकारी हृदय रोग केंद्र में जीवनरक्षक उपकरणों और सामग्री की कमी नहीं होनी चाहिए। अब निगाहें इस बात पर हैं कि स्वास्थ्य विभाग स्टेंट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कितनी तेजी से कदम उठाता है, ताकि हार्ट मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

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