नई दिल्ली/स्टॉकहोम। वैश्विक सुरक्षा मामलों पर नजर रखने वाली संस्था Stockholm International Peace Research Institute की ताजा रिपोर्ट में भारत की परमाणु क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अपने परमाणु हथियारों के भंडार में बढ़ोतरी की है, जिससे दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास वर्ष 2025 की तुलना में अब अधिक संख्या में परमाणु हथियार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत लगातार अपनी परमाणु त्रिस्तरीय क्षमता (थल, जल और वायु आधारित परमाणु प्रणाली) को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत लंबी दूरी की मिसाइलों और आधुनिक डिलीवरी सिस्टम पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान दोनों अपने-अपने परमाणु कार्यक्रमों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। हालांकि भारत की रणनीति मुख्य रूप से न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता (Credible Minimum Deterrence) पर आधारित रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय हो सकती है। पाकिस्तान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को भारत के संदर्भ में देखता रहा है, ऐसे में भारत के हथियार भंडार और तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के अधिकांश परमाणु हथियार अभी भी Russia और United States के पास हैं, लेकिन एशिया में भारत, पाकिस्तान और China के परमाणु कार्यक्रमों पर भी वैश्विक निगाहें बनी हुई हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि बदलते भू-राजनीतिक माहौल और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत अपनी रक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है। वहीं पाकिस्तान भी अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के विस्तार पर काम कर रहा है, जिससे दक्षिण एशिया में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
SIPRI की रिपोर्ट ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में एशिया वैश्विक सामरिक और परमाणु शक्ति संतुलन का महत्वपूर्ण केंद्र बना रह सकता है।

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