ED की कार्रवाई के बाद निगम के इंजीनियर, ऑडिट और अकाउंट्स विभाग पर उठे गंभीर सवाल
इंदौर।
इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित फर्जी बिल और ड्रेनेज कार्य घोटाले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले पुलिस, फिर आर्थिक अपराधों की जांच और अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने इस मामले को मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित नगरीय घोटालों में शामिल कर दिया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि फर्जी बिलों, कूटरचित दस्तावेजों और संदिग्ध भुगतान के जरिए करोड़ों रुपये का खेल हुआ
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मामले में सबसे चर्चित नाम अभय राठौर का रहा है, जो नगर निगम के ड्रेनेज विभाग से जुड़े अधिकारी रहे हैं। पुलिस जांच और बाद की कार्रवाई में उनका नाम प्रमुख आरोपियों में सामने आया। वर्ष 2024 में नगर निगम प्रशासन ने उन्हें निलंबित भी किया था।
जांच एजेंसियों के अनुसार फर्जी बिलों के भुगतान में कई ठेकेदारों और विभागीय कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की गई। रिपोर्टों में मोहम्मद जाकिर, मोहम्मद साजिद, राहुल वडेरा, रेणु वडेरा, उदय भदौरिया, चेतन भदौरिया, अनिल कुमार गर्ग, राजकुमार साल्वी सहित अन्य नाम सामने आए हैं, जिनसे जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई और पूछताछ की जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों में दर्ज है।
ED की जांच में दावा किया गया कि फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया और बाद में धन के लेन-देन को छिपाने के लिए विभिन्न खातों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने 34 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच करने की कार्रवाई भी की थी।
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू ऑडिट और अकाउंट्स सिस्टम को लेकर है। न्यायिक दस्तावेजों और जांच रिकॉर्ड में कुछ ऑडिट अधिकारियों तथा वित्तीय मंजूरी से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप यह है कि संदिग्ध बिलों को समय पर रोका नहीं गया और भुगतान प्रक्रिया में आवश्यक आपत्तियां दर्ज नहीं की गईं। हालांकि इन सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम में फर्जी बिलों से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ती गई और बाद में नए संदिग्ध बिलों की शिकायतें भी सामने आईं। इससे यह सवाल और गहरा हो गया कि क्या यह केवल कुछ व्यक्तियों का खेल था या फिर व्यवस्था की निगरानी प्रणाली में गंभीर खामियां मौजूद थीं।
आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि करोड़ों रुपये के भुगतान हुए तो उनकी तकनीकी स्वीकृति किसने दी, ऑडिट किसने किया, भुगतान किस स्तर पर पास हुए और जवाबदेही आखिर तय किसकी होगी? ED, पुलिस और अन्य एजेंसियों की आगे की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जिम्मेदारी केवल कुछ आरोपियों तक सीमित है या फिर जांच की आंच और बड़े अधिकारियों तक पहुंचेगी।
नोट: उपरोक्त सभी नाम सार्वजनिक रिपोर्टों, जांच दस्तावेजों और समाचार स्रोतों में उल्लिखित हैं। किसी भी व्यक्ति का दोष अदालत द्वारा सिद्ध होना शेष है।

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