बारिश ने तोड़ा किसानों का भरोसा, खेत सूने और बाजार में बढ़ी महंगाई की आशंका
एशिया के कई देशों में सूखे और अनियमित मौसम ने कृषि व्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों को फसलों की बुवाई टालनी पड़ रही है, जिससे वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर दबाव बढ़ने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले हफ्तों में मौसम नहीं सुधरा तो दुनिया को नए खाद्य संकट और महंगाई की बड़ी लहर का सामना करना पड़ सकता है।
भारत से चीन तक चिंता
एशिया दुनिया की बड़ी कृषि अर्थव्यवस्थाओं का केंद्र है। भारत, चीन, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों में धान, गेहूं और अन्य खाद्यान्न फसलों की बुवाई मौसम पर निर्भर करती है। लेकिन इस बार कई इलाकों में बारिश सामान्य से कम होने के कारण किसान इंतजार की स्थिति में हैं।
घट सकता है उत्पादन
विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई में देरी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। यदि फसल चक्र प्रभावित हुआ तो चावल, गेहूं, मक्का और खाद्य तेलों की उपलब्धता कम हो सकती है। इसका असर केवल एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर के खाद्य बाजारों में कीमतें बढ़ सकती हैं।
गरीब देशों पर सबसे बड़ा खतरा
खाद्यान्न की कीमतों में वृद्धि का सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ेगा जो पहले से आर्थिक संकट और खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं। अफ्रीका और एशिया के कई गरीब देशों में खाद्य आयात महंगा हो सकता है, जिससे करोड़ों लोगों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो सकता है।
जलवायु परिवर्तन बना बड़ी चुनौती
मौसम विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा, बाढ़ और अत्यधिक तापमान जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। इसका सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है, जो दुनिया की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है।
दुनिया के सामने बड़ा सवाल
यदि आने वाले महीनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई और फसल उत्पादन घटा, तो दुनिया को एक बार फिर खाद्य महंगाई, आपूर्ति संकट और भूख की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

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