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धर्मेंद्र प्रधान से छिनेगा शिक्षा विभाग Dharmendra Pradhan to lose Education portfolio.




                            • रवि उपाध्याय 


मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान उच्च शिक्षित होने के बावजूद आज वे मोदी सरकार सबसे अधिक विवादास्पद मंत्री हैं। पेपर लीक होने के मामले में न केवल उनकी,बल्कि मोदी सरकार की छबि भी गंभीर रुप से प्रभावित हुई है। हाल ही में NEET 2026 की परीक्षा में हुए पेपर लीक और CBSC की परीक्षा के हुए वैल्युएशन में गड़बड़ियों की वजह से छात्रों और अभिभावकों में भारी जन आक्रोश है। इसको लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा अन्य विपक्ष के नेताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे देने की पुरजोर मांग की है।


कॉकरोच जपा की मांग : देश में विभिन्न प्रतियोगी तथा कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफे की माँग को लेकर 6 मई को नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले युवाओं ने जंतर मंतर पर प्रभावी प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का एसएफआई, आल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन, एनएसयूआई जैसे छात्र संगठनों तथा कांग्रेस-आम आदमी पार्टी जैसे सियासी संगठनों ने भी समर्थन किया है।


विपक्ष के आरोप हैं कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के मंत्रित्वकाल में करीब 44 से लेकर 70 से भी ज्यादा पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं । दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री और उनके महकमे का कहना है कि पेपर लीक होने की घटनाओं के कोई पुख़्ता सबूत और डेटा नहीं हैं। 


प्रधान से छिनेगा विभाग : यह तय है कि संसद के मानसून सत्र के पहले जब भी केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल होगा उसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा विभाग निश्चित रूप से छीन लिया जाएगा। परीक्षा पेपर लीक मामलों की घटनाओं के चलते केंद्र सरकार की काफी बदनामी हुई है। इसका संज्ञान सर्वोच्च न्यायालय ने भी लिया। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने बताया कि पेपर लीक मामलों को प्रधान मंत्री मोदी खुद देख रहे हैं। बतला दें कि पेपर लीक के मामलों की जांच सीबीआई कर रही है। इस मामले में विभिन्न राज्यों से कुछ लोगाें को गिरफ्तार किया गया है।


विपक्ष पहले से ही मोदी सरकार द्वारा लागू की नई शिक्षा निति के खिलाफ़ शुरू से आक्रामक रही है। नई शिक्षा नीति लागू होने के पहले से ही विपक्षी दल नई शिक्षा नीति का विरोध करती रही है। इतना ही नही जब सुश्री स्मिता ईरानी मानव संसाधन विकास मंत्री थीं तब वह भी विपक्ष के नेताओं के निशाने पर रहीं हैं। याद कीजिए राजेश वेमुला और बीएचयू की घटनाएं। विपक्ष विशेषतः कांग्रेस पार्टी चाहती रही है कि देश में नई शिक्षा नीति की कोई जरूरत नहीं है। पुरानी शिक्षा नीति ही चलते रहने देना चाहिए। 


शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में जिन परीक्षाओं के पेपर लीक होने के आरोप लगे हैं। उनका विवरण इस प्रकार हैं। यह बतला दें कि ओड़िशा निवासी धर्मेंद्र प्रधान 7 जुलाई 2021 से केंद्र में शिक्षा मंत्री हैं। 


नीट यूजी पेपर लीक : 2024 में इस प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक होने के गंभीर आरोप लगे। जिसके कारण बिहार व अन्य राज्यों में सीबीआई ने जांच की। पेपर लीक के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किए। इसी तरह सन् 2024 में यूजीसी- - नेट की परीक्षा भी विवादों में रही। इस परीक्षा के पेपर लीक होने के आशंका के चलते उक्त परीक्षा को रद्द किया गया। 


सीयूईटी (CUET) और अन्य: 2022 में अपनी शुरुआत के बाद से ही CUET UG परीक्षा तकनीकी खामियों, सर्वर डाउन होने और केंद्रों पर पेपर न पहुंचने जैसी गड़बड़ियों के कारण विवादों में रही थी।आधिकारिक एवं राजनीतिक रुख: विपक्ष: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का दावा है कि उनके कार्यकाल के दौरान अलग-अलग स्तरों पर लगभग 70 से ज्यादा बार परीक्षाएं प्रभावित या लीक हुई हैं।


सरकारी पक्ष : संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया था कि व्यापक तौर पर 70 पेपर लीक होने का कोई सरकारी या पुख्ता डेटा मौजूद नहीं है और सरकार परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है। हाल ही में NEET की परीक्षा पेपर लीक होने की वजह से निरस्त की गईं। इससे कुछ छात्रों ने निराशाग्रस्त हो कर दुर्भाग्यवश आत्म हत्याएं कर लीं।


2018 में, सीबीएसई को उस समय शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब कक्षा 12 के अर्थशास्त्र और कक्षा 10 के गणित के प्रश्नपत्र लीक हो गए । इसी तरह, 2017 में एसएससी संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा भी प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों से प्रभावित हुई, जिसके चलते बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और सीबीआई ने जांच शुरू की थी।


भारत में पेपर लीक करने या परीक्षा में धांधली करने पर दोषी पाए जाने पर ३ से १० साल तक की जेल और ₹१ करोड़ तक के जुर्माने का सख्त प्रावधान है।


केंद्रीय स्तर पर 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' (Public Examinations Act) के तहत सजा और जुर्माने का वर्गीकरण निम्नलिखित है : 


1. व्यक्तिगत दोषियों के लिए सजा: 03 से 05 साल तक की कैद। जुर्माना: 10 लाख रुपए तक का जुर्माना। 


2. संगठित गिरोहों, माफिया और संस्थानों के लिए । सजा: 5 से 10 साल तक की कैद।

जुर्माना: 01 करोड़ तक का जुर्माना और दोषियों की संपत्ति कुर्क (जब्त) करने का प्रावधान। 3. परीक्षा सेवा प्रदाताओं (Service Providers) के लिए

जुर्माना: यदि कोई परीक्षा आयोजन एजेंसी या कंपनी पेपर लीक में शामिल पाई जाती है, तो उस पर ₹01 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, उनसे परीक्षा का पूरा खर्च वसूला जाएगा और 4 साल तक परीक्षाओं के आयोजन पर बैन लगा दिया जाएगा। 


इसके अतिरिक्त, भारतीय दंड संहिता/भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं, जैसे धोखाधड़ी (Section 318 BNS) और आपराधिक षड्यंत्र के तहत भी अलग से कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती है। ये सभी अपराध गैर-जमानती (Non-bailable) श्रेणी में आते हैं।


पेपर लीक के कुछ मामलों में आरोपियों को सजा (जेल) और जुर्माना हुआ है। जिसके अंतर्गत रेलवे (RRB-Mumbai) परीक्षा लीक (2010) मामले में CBI की विशेष अदालत ने वर्ष 2010 के आरआरबी-मुंबई भर्ती परीक्षा लीक मामले में पूर्व चेयरमैन सतेन्द्र मोहन शर्मा, उनके बेटे और 8 अन्य आरोपियों को 5 साल की कठोर कारावास और सामूहिक रूप से ₹7.87 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई गई। 


रेलवे परीक्षा लीक (2002): अहमदाबाद की सीबीआई अदालत ने 2002 के रेलवे परीक्षा लीक मामले में 7 रेलवे अधिकारियों और एक आरपीएफ कांस्टेबल को दोषी ठहराया था । इन सभी को 5 साल की कठोर कैद और ₹5-5 लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई थी。राज्य स्तरीय परीक्षाएं: उत्तर प्रदेश (UPTET 2021) और उत्तराखंड (UKSSSC 2022) जैसे कई मामलों में लिप्त मास्टरमाइंड और अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, उन पर कानूनी मामले चल रहे हैं।


केंद्रीय परीक्षाओं के अलावा विभिन्न राज्यों में भी व्यावसायिक या शैक्षणिक परीक्षा के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आती रहीं हैं। राजस्थान के मुख्य मंत्री रहे अशोक गहलोत के कार्यकाल में भी पेपर लीक की घटनाएं काफी चर्चा में रहीं हैं। 


राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्य भारत में पेपर लीक की घटनाओं से सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं। एक मीडिया डेटा विश्लेषण के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में दर्जनों पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। विभिन्न राज्यों में पेपर लीक की कुछ घटनाओं का विवरण इस प्रकार है।


उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा (2024): करीब 48 लाख उम्मीदवारों वाली इस विशाल परीक्षा का पेपर सोशल मीडिया पर लीक हो गया था, जिसके बाद सरकार को इसे रद्द करना पड़ा था।RO/ARO परीक्षा (2024): समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) की परीक्षा भी पेपर लीक के चलते रद्द की गई थी।


UPTET (2021): उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा का पेपर व्हाट्सएप पर लीक होने के कारण परीक्षा के दिन ही इसे रद्द करना पड़ा था।2. बिहार (Bihar)BPSC 67वीं प्रीलिम्स (2022): बिहार लोक सेवा आयोग की इस परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले वायरल हो गया था, जिसके बाद पूरी परीक्षा रद्द की गई।


शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3): हाल के वर्षों में बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में भी बड़े पैमाने पर पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के शामिल होने के मामले सामने आए हैं। 3. मध्य प्रदेश व्यापम घोटाला (Vyapam Scam): यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा परीक्षा और भर्ती घोटाला माना जाता है। इसमें मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं (PMT) और सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं के पेपर लीक, फर्जी उम्मीदवार और ओएमआर शीट में हेरफेर जैसी कई घटनाएं शामिल थीं।


पटवारी भर्ती परीक्षा: हाल के वर्षों में पटवारी भर्ती परीक्षा के नतीजों और चयन प्रक्रिया को लेकर भी भारी विवाद और गड़बड़ी के आरोप लगे थे।


4. गुजरात विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाएं : गुजरात में पिछले 10-11 वर्षों में 14 से अधिक पेपर लीक के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें क्लर्क भर्ती परीक्षा, हेड क्लर्क परीक्षा (2021), जूनियर क्लर्क परीक्षा (2023) और मुख्य सेविका जैसी कई राज्य स्तरीय परीक्षाएं शामिल हैं जिन्हें लीक के बाद रद्द करना पड़ा।


5. अन्य प्रभावित राज्य उत्तराखंड: यहाँ UKSSSC (अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा और पटवारी/लेखपाल भर्ती परीक्षा (2023) के पेपर लीक हुए थे। महाराष्ट्र और हरियाणा: हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक के तारों के संबंध में जांच एजेंसियों (जैसे CBI) ने महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार में बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।


पश्चिम बंगाल: यहाँ स्कूल सेवा आयोग (SSC) के तहत शिक्षक भर्ती में ओएमआर शीट बदलने और पैसों के बदले नौकरियां बेचने का बड़ा घोटाला सामने आया था।


भाजपा के लिए योगदान : धर्मेंद्र प्रधान भले ही पेपर गोपनीयता बनाए रखने के मामले भले ही असफल रहे हों लेकिन यह वास्तविकता यह है कि अभी तक हुए पेपर लीक मामले में उन्हें सीधे दोषी ठहराना भी ठीक नहीं होगा। पेपर्स लीक मामलों में यदि सीधी जवाबदारी किसी की है तो वो संबंधित संस्थाएं,पेपर सैटर्स, प्रिंटर्स हैं। लेकिन विभागीय मंत्री होने के नाते धर्मेंद्र प्रधान भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।


प्रधान की चुनावी सफलताएं : धर्मेंद्र प्रधान चुनाव रणनीति के उस्ताद हैं। उनके इसी कौशल को देखते हुए उन्हें 2015 और 2025 के विधानसभा चुनावों में बिहार,2022 में उत्तर प्रदेश,2024 में हरियाणा, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, ओडिशा का चुनाव प्रभारी बनाया गया। इन सभी चुनावों में पार्टी को आशातीत सफलता मिली। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बिहार राज्य की जिम्मेदारी थी। इस चुनाव में भाजपा को 40 में 31 सीटों पर कामयाबी मिली।



( लेखक राजनैतिक समीक्षक एवं एक व्यंग्यकार भी हैं। )


07062026

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