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शपथ ग्रहण में हिंदू परंपराओं के पालन पर उठे सवालों का दिया जवाब, बोले- आस्था निजी है, राजनीति नहीं
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने अपनी धार्मिक आस्था को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच स्पष्ट कहा है कि वह अपना हिंदू धर्म और अपनी पहचान नहीं छोड़ सकते। उन्होंने कहा कि हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करना उनकी व्यक्तिगत आस्था का हिस्सा है और इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
डीके शिवकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले और बाद में किए गए धार्मिक अनुष्ठान उनकी निजी श्रद्धा और पारिवारिक परंपराओं से जुड़े थे। उन्होंने कहा, “मैं हिंदू हूं और अपनी आस्था का पालन करता हूं। मैं अपनी पहचान और धर्म को नहीं छोड़ सकता। इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।”
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सर्वोपरि है तथा सरकार सभी धर्मों और समुदायों के लिए समान रूप से काम करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने का अधिकार है और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
हाल के दिनों में शपथ ग्रहण समारोह और उससे जुड़े धार्मिक आयोजनों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हुई थी। विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक समूहों ने इस पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद शिवकुमार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी धार्मिक आस्था निजी विषय है, जबकि शासन और प्रशासन संविधान के दायरे में ही संचालित होगा।
डीके शिवकुमार के इस बयान के बाद कर्नाटक की राजनीति में धर्म, पहचान और सार्वजनिक जीवन में आस्था की भूमिका को लेकर नई बहस छिड़ गई है। हालांकि मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार का ध्यान विकास, सुशासन और जनता से जुड़े मुद्दों पर रहेगा।

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