नई दिल्ली।
कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन निर्माण में अपनी क्षमता साबित करने के बाद अब एक भारतीय कंपनी दुनिया के सबसे खतरनाक वायरसों में से एक इबोला (Ebola Virus) के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने की दौड़ में शामिल हो गई है। इबोला के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों ने करीब 570 करोड़ रुपये (लगभग 67 मिलियन डॉलर) का फंड आवंटित किया है, जिसमें भारतीय कंपनी सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को सहयोग दिया जाएगा।
200 से अधिक मौतें, 900 से ज्यादा संक्रमित
अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस का खतरा लगातार बढ़ रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार इस प्रकोप में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 900 से ज्यादा लोग संक्रमित बताए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को डर है कि यदि समय रहते प्रभावी वैक्सीन और उपचार विकसित नहीं किए गए तो संक्रमण दूसरे देशों तक भी फैल सकता है।
भारत की बढ़ती भूमिका
कोरोना काल में भारतीय कंपनियों ने कम लागत और बड़े पैमाने पर वैक्सीन उत्पादन की क्षमता दिखाई थी। इसी अनुभव को देखते हुए अब इबोला वैक्सीन अनुसंधान में भी भारतीय भागीदारी बढ़ाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बायोटेक और फार्मा कंपनियां वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
क्या है इबोला वायरस?
इबोला एक अत्यंत घातक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलती है। इसमें तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और कई मामलों में आंतरिक व बाहरी रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याएं होती हैं। समय पर उपचार न मिलने पर मृत्यु दर बहुत अधिक हो सकती है।
दुनिया की नजर वैक्सीन पर
विश्व स्वास्थ्य समुदाय का मानना है कि इबोला के नए प्रकोप को रोकने के लिए सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन ही सबसे बड़ा हथियार साबित होगी। इसी उद्देश्य से विभिन्न देशों की कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों को वित्तीय सहायता देकर अनुसंधान तेज किया जा रहा है।
यदि यह परियोजना सफल होती है तो भारत एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा और इबोला जैसी घातक बीमारी से लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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