अलवर के राजगढ़ रेंज में 2023-24 के कार्यों को लेकर विवाद, पहली जांच में एसीबी जांच की सिफारिश, अब तीसरी रिपोर्ट का इंतजार
राजस्थान के वन विभाग में कथित 17 करोड़ रुपये के पौधारोपण और मृदा कार्य घोटाले को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्मा के गृह जिले अलवर से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां राजगढ़ वन रेंज में वर्ष 2023-24 के दौरान हुए कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
वन विभाग की पहली आंतरिक जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि ग्राम वन संरक्षण एवं प्रबंधन समितियों के खातों से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गई। जांच में फर्जी बिल, कथित जाली हस्ताक्षर, मनगढ़ंत मजदूरी रिकॉर्ड और मापन पुस्तिकाओं में हेरफेर जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट ने मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को सौंपने की सिफारिश भी की थी।
15 महीने बाद भी कार्रवाई नहीं
मामले का सबसे विवादित पहलू यह है कि पहली जांच रिपोर्ट आने के बावजूद 15 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एसीबी जांच शुरू नहीं हो सकी। बाद में दूसरी जांच कराई गई, जिसमें यह तर्क दिया गया कि अधिकांश भुगतान बैंक खातों के माध्यम से हुए हैं, इसलिए एसीबी जांच की आवश्यकता नहीं है। इस निष्कर्ष पर विभाग के भीतर भी सवाल उठे और अब तीसरी जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
क्या हैं आरोप?
जांच दस्तावेजों के अनुसार राजगढ़ रेंज में अग्रिम मृदा कार्यों और पौधारोपण योजनाओं के नाम पर लगभग 17 करोड़ रुपये के भुगतान किए गए। पहली जांच में दो करोड़ रुपये से अधिक के अनावश्यक खर्च और 15 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध निकासी का उल्लेख किया गया था। अधिकारियों और समिति पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई।
विभागीय स्तर पर मचा हड़कंप
सूत्रों के अनुसार पहली और दूसरी जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों में बड़ा अंतर होने के कारण विभाग के भीतर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि यदि स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई गई तो पौधारोपण योजनाओं में लंबे समय से चल रही व्यापक अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
विपक्ष को मिला मुद्दा
मामला सामने आने के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया है। विपक्षी दल इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार और वन विभाग का कहना है कि प्रक्रिया के अनुसार जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल
17 करोड़ रुपये के कथित घोटाले, एसीबी जांच की सिफारिश, फिर दूसरी जांच से बदले निष्कर्ष और अब तीसरी रिपोर्ट के इंतजार ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सच क्या है—क्या यह महज विभागीय प्रक्रियाओं का हिस्सा है या फिर किसी बड़े घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश?
**(नोट: मामले में आरोपों की जांच अभी जारी है। अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों और विभागीय रिपोर्ट के आधार पर ही तय होंगे।)**

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