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तमिलनाडु : राहुल ने प्रशस्त किया विजय पथ Tamil Nadu: Rahul paves the way for victory

   • रवि उपाध्याय 


मई माह की चार तारीख को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी सहित जिन चार राज्यों असम, केरलम, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधान सभा चुनावों के नतीजे आए थे उनमें से असम और केरलम को छोड़कर सभी प्रदेशों में सरकारें गठित हो चुकीं हैं। केरलम में यूडीएफ को बहुमत मिला है। परंतु वहां रस्साकसी के चलते विधायक दल का नेता नहीं चुना जा सका है। असम में भाजपा की सरकार बननी है और वहां हिमंत बिस्वा सरमा 12 मई को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।


रविवार को तमिलनाडु में सी जोसेफ विजय के नेतृत्व में टीवीके की अगुवाई वाली मिली जुली सरकार का गठन किया गया। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथअर्लेकर ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।


राहुल ने प्रशस्त किया विजय पथ 


तमिलनाडु विधान सभा चुनावों के चार मई को घोषित नतीजों में किसी भी दल या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था। 234 सदस्यीय विधान सभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। इन चुनावों में फिल्म अभिनेता सी जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी। परंतु वह बहुमत से 10 सीट से दूर थी। ऐसे में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सक्रिय हुए और उन्होंने ने डीएमके गठबंधन से कांग्रेस का 55 सालों पुराना साथ तोड़ते हुए टीवीके साथ जाना तय किया। इन चुनावों में कांग्रेस के तमिलनाडु विधान सभा में 05 सदस्य चुनाव जीते हैं। 


राहुल गांधी ने बहुमत जुटाने के लिए अपने अलावा CPI,CPM, VCK और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के 2-2 सदस्यों का समर्थन जुटाने में भी विजय का सहयोग किया। यह तीनों पार्टियां चुनाव में डीएमके गठबंधन के सदस्य थे और उसके साथ मिल बांट कर चुनाव लड़ा था। पांचों राज्यों में तमिलनाडु ही ऐसा राज्य था जहां किसी भी गठबंधन या पार्टी को पूर्ण बहुमत न मिलने के चलते वहां त्रिशंकु विधानसभा बनी। टीवीके प्रमुख सी जोसेफ विजय चुनाव परिणाम आने के बाद 06 मई को ही सरकार बनाने का दावा करने गवर्नर हाउस पहुंच गए थे। परंतु उनके पास बहुमत का जादूई अंक (118) नहीं होने के कारण राज्यपाल ने उन्हें तीन बार खाली हाथ लौटा दिया था ।


डीएमके- एडीएमके से डरे थे विजय : 


चुनाव में जब विजय को बहुमत नहीं मिला तो डीएमके के स्टालिन और एडीएमके के ई.पलनीस्वामी के बीच मिलकर सरकार बनाने के लिए खिचड़ी पकने लगी। एक तरफ डीएमके के गठबंधन में कांग्रेस पार्टी थी तो दूसरी तरफ एआईडीएमके गठबंधन में भाजपा शामिल थी। चुनावी महा संग्राम में टीवीके अकेली मैदान में थी।एक बार तो एआईडीएमके विजय के साथ जाने के लिए भाजपा से दामन छुड़ाने तक को तैयार हो गई थी। तभी राहुल गांधी ने डीएमके का 55 साल पुराना साथ छोड़कर सत्ता में भागीदारी का यह सुनहरा मौका लपक लिया।


सेक्युलर होने का ढोंग : सरकार बनाने के लिए सी जोसेफ विजय (जो कि ईसाई हैं) भाजपा के बिना द्रविड़ वादी AIADMK एआईएडीएमके पार्टी के 47 सदस्यों का समर्थन लेने को तैयार थे। उनकी यह शर्त थी कि AIADMK भाजपा से अपना गठबंधन तोड़ ले। विजय का कहना था कि वह भाजपा की विचारधारा के खिलाफ हैं। इसके लिए पलानीस्वामी तैयार भी हो गए थे। यह मामला पकता उसके पहले राहुल गाँधी ने सीपीआई, सीपीएम,वीसीके और मुस्लिम लीग के साथ मिल कर जोसेफ विजय के नेतृत्व में तमिलनाडु में मिली जुली सरकार बनवा दी। कांग्रेस को इसका यह फायदा हुआ कि वह सत्ता के पास पहुंच गई। उसको उम्मीद है कि उसे इसका भविष्य में फायदा मिलेगा।


धर्म निरपेक्षता का पाखंड : फिल्म अभिनेता से नेता बने सी जोसेफ विजय का यह सियासी पाखंड देखिए कि एक तरफ तो वह भाजपा की विचारधारा को तो नापसंद करते थे लेकिन उन्हें सरकार बनाने के लिए उन्होंने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसी इस्लामी पार्टी का साथ लेने में कोई गुरेज नहीं हुआ। इससे उनकी हिपोक्रेसी पता चलती है।तमिलनाडु 2026 के अनुमानों के अनुसार तमिलनाडु में मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत महज 5 -7 प्रतिशत है। जबकि राज्य में 2011की जनगणना के अनुसार मुस्लिमों की संख्या 42.29 लाख है। यह राज्य की आबादी का कुल 5.86 % है। दूसरी तरफ तमिलनाडु में ईसाई जनसंख्या 6.12 प्रतिशत है। वहीं राज्य में हिंदुओं की जनसंख्या 87.58 प्रतिशत है।


पिछली विधानसभा में कांग्रेस DMK के गठबंधन में शामिल थी । तब राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से कांग्रेस पार्टी को मंत्री मंडल में शामिल करने का कई बार अनुरोध किया। परंतु स्टालिन ने राहुल गांधी को कोई तबज्जों नहीं दी। अब राहुल गांधी ने डीएमके से गठबंधन तोड़ कर अपना वह पुराना बदला चुकता कर लिया है।


केरलम् में उलझा मामला : केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी,असम और केरलम राज्य में मतदान 09 अप्रैल 2026 को हुआ था। जबकि दक्षिण भारत के तमिलनाडु में मतदान 23 अप्रैल को एक चरण में संपन्न हुआ।पश्चिम बंगाल में दो चरणों में क्रमशः 23 और 29 अप्रैल को मतदान हुआ था।


तमिलनाडु एवं केरलम् प्रदेश को छोड़ कर अन्य किसी भी राज्य में नई सरकार के गठन में पहले से ही कोई समस्या नहीं थी। क्योंकि असम, पश्चिम बंगाल तथा केंद्र शासित पुडुचेरी में भाजपा और एनडीए को विधानसभा चुनावों में स्पष्ट और भारी बहुमत मिला था। वहां सरकारों के नेतृत्व के लिए मुख्यमंत्री के लिए का नाम पहले से ही तय थे। जबकि दूसरी तरफ केरलम् में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को विधान सभा चुनावों में बहुमत मिला है। वहां मुख्यमंत्री के नाम को लेकर एक सप्ताह से मसला उलझा है। केरलम् में UDF की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए आधा दर्जन नेता लाइन में हैं। इनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन,रमेश चेन्निथला,के सी वेणुगोपाल, शशि थरूर, केपीसीसी के अध्यक्ष और पैरांबूर से विधायक सनी जोसेफ के नाम शामिल हैं।


केरलम जैसा तमाशा कहीं नहीं :केरलम को छोड़ दें तो नई सरकार गठन की कोई समस्या असम,पश्चिम बंगाल और पुद्दुचेरी में नहीं उत्पन्न हुई। इसका मुख्य कारण यह था कि वहां भाजपा या एनडीए को बहुमत प्राप्त हुआ था। इसी कारण से इन राज्यों में आसानी से नई सरकारों का गठन हो गया। तमिलनाडु में मसला त्रिशंकु विधानसभा का था। इसलिए वहां सरकार के गठन में विलंब हुआ।


पश्चिम बंगाल में शुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में तथा पुडुचेरी में एन रंगास्वामी के नेतृत्व में सरकारें गठित हो चुकीं हैं। जबकि असम प्रदेश में 12 मई को शपथ ग्रहण समारोह होना तय है। यहां निवृत्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शरमा लगातार दूसरी बार शपथ लेने वाले हैं। इन तीनों राज्यों में से असम और केंद्र शासित पुद्दुचेरी में एनडीए की सरकारें हैं। जबकि पश्चिम बंगाल में विशुद्ध रूप से भाजपा की सरकार बनी है।


एक ही पॉवर सेंटर : तमिलनाडु में मुख्य मंत्री पद की शपथ लेने के बाद सी जोसेफ विजय थलापति ने मंच पर राहुल गांधी की मौजूदगी अपने भाषण में साफ कर दिया कि राज्य में सरकार का पॉवर सेंटर एक ही रहेगा और वह पॉवर सेंटर होगा वह स्वयं विजय ही होंगे। मंच पर मौजूद राहुल गांधी की बॉडी लैंग्वेज से यह प्रदर्शित हो रहा था कि वह विजय थलापति सरकार के मेंटर हैं। शायद इसी को देखते हुए नव निर्वाचित मुख्यमंत्री ने यह बात कही है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस पार्टी चाहती थी कि विजय के मंत्री मंडल में उनके दो या तीन विधायकों को शामिल करें, लेकिन विजय ने ऐसा नहीं किया।

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