पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज से एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सत्ता और संगठन दोनों के केंद्र में शुभेंदु अधिकारी उभरकर सामने आए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बंगाल में अब “ममता मॉडल” की जगह “शुभेंदु मॉडल” चलेगा।
15 साल तक बंगाल की राजनीति पर एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी की सत्ता आखिरकार ढह गई। नंदीग्राम से शुरू हुई लड़ाई अब पूरे बंगाल की सत्ता तक पहुंच चुकी है। बीजेपी खेमे में जश्न का माहौल है, जबकि टीएमसी के कई बड़े नेताओं ने चुप्पी साध ली है।
बीजेपी सूत्रों का दावा है कि नई सरकार में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक फेरबदल सबसे बड़ी प्राथमिकता होंगे। कई जिलों में बड़े अफसरों की सूची तैयार होने की चर्चा भी तेज है। वहीं टीएमसी नेताओं और सिंडिकेट नेटवर्क पर कार्रवाई की अटकलों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी अब केवल विपक्ष के नेता नहीं, बल्कि बंगाल की नई सत्ता का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने जिस आक्रामक शैली में ममता सरकार को घेरा, उसी रणनीति ने बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाया।
उधर टीएमसी खेमे में हार के बाद अंदरूनी कलह खुलकर सामने आने लगी है। कई नेताओं ने संगठन की कार्यशैली और टिकट वितरण पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की मांग भी उठने लगी है।
दिल्ली से लेकर कोलकाता तक अब नजर इस बात पर है कि बंगाल में नई सरकार कितनी तेजी से फैसले लेती है और क्या बीजेपी अपने चुनावी वादों को जमीन पर उतार पाती है। लेकिन फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि बंगाल की राजनीति में आज से एक नया अध्याय शुरू हो चुका है — और उसका नाम है “शुभेंदु

Post a Comment