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सीलिंग एक्ट खत्म हो गया, फिर इसे कानून कैसे बता रही सरकार; एमपी हाईकोर्ट ने मांगा जवाबThe Sealing Act has been abolished, so how is the government calling it law? The MP High Court has sought an answer.



इंदौर। वर्ष 2000 में खत्म हो चुके सीलिंग एक्ट को अब भी अधिकारी कानून बता रहे हैं। प्रस्तुत जनहित याचिका में कोर्ट ने शासन से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका नेशनल रियल इस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (एनआरईडीसी) ने प्रस्तुत की है।

 याचिका में आरोप लगाया है कि वर्ष 1976 में सीलिंग एक्ट लागू किया गया था, लेकिन वर्ष 1999 में प्रस्ताव पारित करते हुए वर्ष 2000 से सीलिंग एक्ट को समाप्त कर दिया गया। आदेश में ही स्पष्ट था कि जो जमीन शासन द्वारा ले ली गई हैं वे तो शासन के पास रहेंगी, लेकिन जिन भूमि का अधिग्रहण नहीं हो सका वे इस एक्ट से मुक्त रहेंगी।

हालांकि शासन ने कुछ कार्यों के लिए भूमि लेने का अधिकार सुरक्षित रखा था। प्रमुख सचिव राजस्व ने वर्ष 2022 में पांच से ज्यादा पत्र जारी किए। इनमें कहा गया कि सीलिंग एक्ट खत्म हो गया है, लेकिन उसके लिए लगाई गई शर्तें और उल्लंघन के नियम अब भी प्रभावी हैं।

जमीनें उलझ रही हैं


इसके चलते सीलिंग के नाम पर जमीनें उलझ रही हैं। कई लोग प्रभावित हो रहे हैं। सोमवार को मामले में हुई सुनवाई के दौरान हमने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2007 में जारी पत्र में साफ किया गया है कि वर्ष 2000 के बाद से सीलिंग एक्ट से जुड़ा कोई भी नियम अस्तित्व में नहीं है।

कोर्ट के समक्ष कुछ प्रकरण भी रखे जिनमें बताया कि जो कानून अस्तित्व में ही नहीं है उसके नाम पर मनमानी की जा रही है। कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

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