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MP में शराब खेल पर सियासी तूफान, उज्जैन से गुजरात तक तस्करी के आरोप; अफसरों पर सवालों की बौछारLiquor trade sparks political storm in MP, with allegations of smuggling from Ujjain to Gujarat; officials bombarded with questions



मध्य प्रदेश में शराब तस्करी और ‘ओवर रेटिंग’ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उज्जैन से गुजरात तक अवैध सप्लाई के गंभीर आरोपों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इसलिए और संवेदनशील हो गया है क्योंकि इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह जिले से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों के हवाले से आरोप है कि वेयरहाउस स्तर पर कमीशनखोरी का खेल चल रहा है, जहां सुखनंदन पाठक (वेयरहाउस प्रभारी) और हर्षवर्धन राय (आबकारी उपायुक्त) के नाम चर्चा में हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि अगर इतने बड़े स्तर पर गतिविधियां हो रही हैं, तो जिम्मेदार विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी?

अब उंगलियां सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आबकारी विभाग के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच रही हैं। आबकारी आयुक्त, प्रमुख सचिव और विभागीय नेतृत्व की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर कैसे पड़ गई। विपक्ष इसे “सिस्टम फेलियर” बता रहा है, जबकि स्थानीय लोग इसे खुला संरक्षण मान रहे हैं।

इसी बीच, भोपाल, जबलपुर, देवास, सिवनी और इंदौर में शराब दुकानों पर ‘ओवर रेटिंग’ के मामले भी सामने आए हैं। कई जगहों पर ₹75 का क्वार्टर ₹100 तक बेचे जाने, रेट लिस्ट गायब रहने और निजी QR कोड से पेमेंट लेने जैसे आरोपों ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देर रात शटर बंद कर अवैध बिक्री के वीडियो भी सामने आए हैं, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है—अगर मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही हालात ऐसे हैं, तो बाकी प्रदेश में क्या स्थिति होगी? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन गंभीर आरोपों पर कार्रवाई करती है या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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