घोषणाओं की सरकार या काम की सरकार?
बौद्धिक प्रतिकार । प्रणव बजाज
आज मध्य प्रदेश का आम नागरिक एक ही सवाल पूछ रहा है — आखिर हमारी सरकार कर क्या रही है?
देश के कई राज्यों में मुख्यमंत्री दिन-रात काम कर रहे हैं। कहीं युवाओं के लिए रोजगार योजनाएं शुरू हो रही हैं, कहीं महिलाओं को आर्थिक ताकत दी जा रही है, कहीं शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं, तो कहीं राष्ट्रभक्ति और संस्कृति को मजबूत करने वाले फैसले तुरंत लागू किए जा रहे हैं। लेकिन मध्य प्रदेश… आज भी सिर्फ घोषणाओं और विज्ञापनों के सहारे चल रहा है।
प्रदेश की जनता अब तुलना कर रही है।
वह देख रही है कि दूसरे राज्यों में फैसले जमीन पर उतर रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश में फाइलें और भाषण ही आगे बढ़ रहे हैं।
हाल ही में पश्चिम बंगाल में “वंदे मातरम्” को लेकर बड़ा निर्णय लागू किया गया। वहां सरकार ने साफ संदेश दिया कि राष्ट्र पहले है। लेकिन मध्य प्रदेश में ऐसी पहल क्यों नहीं दिखाई देती? आखिर वह प्रदेश, जिसने देश को राष्ट्रवाद की मजबूत आवाज दी, आज फैसलों में इतना कमजोर क्यों नजर आ रहा है?
मुख्यमंत्री Mohan Yadav की सरकार लगातार बड़े-बड़े दावे कर रही है। अरबों रुपये की योजनाओं की घोषणाएं हो रही हैं, लेकिन जनता पूछ रही है —
क्या सिर्फ घोषणाओं से पेट भर जाएगा?
क्या विज्ञापनों से युवाओं को नौकरी मिल जाएगी?
क्या भाषणों से किसान का कर्ज उतर जाएगा?
गांवों में किसान परेशान है।
शहरों में बेरोजगार युवा भटक रहा है।
महंगाई ने मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है।
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि बिना “सेटिंग” के आम आदमी का काम तक नहीं होता।
सरकार हर मंच से “विकास” बोलती है, लेकिन जनता पूछ रही है — विकास कहां है?
सड़कें बदहाल हैं।
सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं कमजोर हैं।
भर्ती परीक्षाएं समय पर नहीं हो रहीं।
निवेश के बड़े दावे हैं, लेकिन रोजगार दिखाई नहीं दे रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार जनता की सुन भी रही है या नहीं?
आज मध्य प्रदेश में ऐसा माहौल बन चुका है जहां जनता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है। लोग कह रहे हैं कि सरकार केवल इवेंट मैनेजमेंट में व्यस्त है। जमीन पर बदलाव की गति बेहद धीमी है। जनता अब नाराज है और यह नाराजगी धीरे-धीरे आक्रोश में बदल रही है।
लोकतंत्र में सत्ता जनता देती है और जनता ही वापस लेती है।
अगर सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरेगी, तो जनता जवाब भी देगी।
मध्य प्रदेश को प्रचार नहीं, परिणाम चाहिए।
घोषणाएं नहीं, ज़मीन पर काम चाहिए।
और अगर सरकार अब भी नहीं जागी, तो जनता आने वाले समय में बड़ा फैसला लेने से पीछे नहीं हटेगी।


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