खाड़ी में बढ़ा तनाव, समुद्र में फंसे हजारों नाविकों की जान पर संकट
तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर सीधे हमले की खुली चेतावनी देकर हालात को और गंभीर बना दिया है। ईरानी सेना ने साफ कहा है कि अगर उसके तेल टैंकरों या व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया गया तो अमेरिका के सैन्य अड्डों और युद्धपोतों पर जवाबी हमला किया जाएगा।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दो टूक कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी तरह की कार्रवाई का जवाब सीधे सैन्य ताकत से दिया जाएगा। ईरानी मीडिया में दावा किया गया है कि मिसाइल और ड्रोन पहले से ही संभावित लक्ष्यों पर नजर बनाए हुए हैं और केवल आदेश मिलने का इंतजार है।
ट्रंप के 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर अटका मामला
अमेरिका की ओर से तनाव कम करने के लिए 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन उस पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद थी कि ईरान जल्द जवाब देगा, मगर तेहरान ने साफ संकेत दिया है कि बिना शीर्ष नेतृत्व और सुरक्षा परिषद की मंजूरी के कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि प्रस्ताव की तकनीकी और सुरक्षा स्तर पर जांच की जा रही है। जब तक अंतिम राय नहीं बनती, तब तक अमेरिका को इंतजार करना होगा।
समुद्र में बढ़ा खतरा, हजारों नाविक दहशत में
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 20 हजार नाविक पिछले कई सप्ताह से समुद्र में फंसे हुए हैं। लगातार हमलों और मिसाइल खतरे की वजह से जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारियों में भय का माहौल है।
बताया जा रहा है कि अब तक कई नाविकों की मौत भी हो चुकी है। तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों के चालक दल लगातार असुरक्षा के बीच काम कर रहे हैं। उन्हें डर है कि किसी भी समय मिसाइल या ड्रोन हमला हो सकता है।
लेबनान और पश्चिम एशिया पर भी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है। लेबनान, सीरिया और खाड़ी देशों में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है। कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा सलाह भी जारी की है।
भारत की बढ़ी चिंता
तनाव के बीच हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। भारत सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्गों पर असर पड़ने की आशंका के चलते आर्थिक मोर्चे पर भी दबाव बढ़ सकता है।

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