अमेरिका से चल रहे तनाव और अमेरिकी नेवी की नाकेबंदी की वजह से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर बंद कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए भी कहा है, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी नहीं हटेगी, तब तक यह जलमार्ग बंद ही रहेगा। ईरान के इस फैसले से भारत समेत कई देशों को परेशानी हो रही है, जिस पर अब ईरान की प्रतिक्रिया सामने आ गई है।
ईरान ने जताया अफसोस
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के अपने फ़ैसले का बचाव किया लेकिन साथ ही भारत और अन्य देशों पर इसके असर पर अफसोस भी जताया। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि अमेरिका और इज़रायल ने गल्फ क्षेत्र में मौजूद अपने ठिकानों का इस्तेमाल करके ईरान पर हमले किए थे।
भारत को हो रही परेशानी से खुश नहीं ईरान
बघाई ने तर्क दिया कि ईरान का कदम अंतर्राष्ट्रीय कानून के मुताबिक था और वैश्विक व्यापार और ऊर्जा मार्गों में आई रुकावट के लिए अमेरिका और इज़रायल ज़िम्मेदार हैं, न कि ईरान। बघाई ने आगे कहा, "युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट हर देश के लिए खुला और आज़ाद था। ईरान को अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत कुछ कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा लेकिन ईरान ने जो किया वो जायज़ है। हमें हमलावरों अमेरिका और इज़रायल का सामना करना पड़ा। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने में ईरान की कोई गलती नहीं थी। इस वजह से भारत और अन्य कई देशों को परेशानी हो रही है और हम इससे खुश नहीं हैं, लेकिन इसके पीछे अमेरिका और इज़रायल ज़िम्मेदार हैं।"

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