भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में दुनिया में तीसरा स्थान प्राप्त कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के आंकड़ों के अनुसार भारत ने ब्राजील को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाम हासिल किया है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार 31 मार्च 2026 तक भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता 283.46 गीगावॉट पहुंच गई है, जिसमें अकेले नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 274.68 गीगावॉट है।
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 55.3 गीगावॉट गैर-जीवाश्म क्षमता जोड़कर नया रिकॉर्ड बनाया। इस दौरान सौर ऊर्जा क्षमता बढ़कर 150.26 गीगावॉट और पवन ऊर्जा क्षमता 56.09 गीगावॉट तक पहुंच गई।
देश ने जून 2025 में अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया था, जो पेरिस समझौते के तहत तय 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले की उपलब्धि मानी जा रही है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। इसके लिए सौर, पवन, बायो एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ाया जा रहा है
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह उपलब्धि केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम है। हालांकि विशेषज्ञों ने ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा भंडारण क्षमता को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

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