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बाबा महाकाल की नगरी में संत की अग्नि तपस्या, सुलगते उपलों के बीच कर रहे नारायण का जापIn the city of Baba Mahakal, a saint performs austerity by performing fire, chanting Narayan amidst smoldering cow dung cakes.

 


बाबा भरत दास की तपस्या के सख्त नियम भी हैं. वे हर दिन निर्धारित समय में बिना किसी आहार या जल ग्रहण किए तप में लीन रहते हैं. बताया जाता है कि वे हर वर्ष इसी तरह प्रचंड गर्मी के बीच यह कठिन साधना करते हैं और भगवान महाकाल शिव की आराधना कर विश्व कल्याण और शांति की कामना करते हैं.


चारों ओर जलते उपलों का घेरा

तपस्या की प्रक्रिया भी बेहद खास है. बाबा सबसे पहले एक स्थान पर बैठते हैं और अपने चारों ओर उपलों (गोबर के कंडों) से घेरा बनाते हैं. इसके बाद उस घेरे में आग लगाई जाती है, जिससे सभी उपले जलने लगते हैं. धुएं और तेज गर्मी के बीच वे उसी घेरे में बैठकर अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप करते रहते हैं. यह दृश्य देखने वालों के लिए अद्भुत और अलौकिक अनुभव जैसा होता है.


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तरह की कठोर तपस्या अक्सर सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान उज्जैन में देखने को मिलती है. इस अवसर पर देशभर से संत-महात्मा यहां पहुंचते हैं और विभिन्न प्रकार की तप साधनाओं के माध्यम से भगवान की आराधना करते हैं. कोई वर्षों तक एक हाथ उठाए रखता है तो कोई एक पैर पर खड़े होकर तप करता है. ऐसे में बाबा भरत दास की यह साधना भी लोगों को गहरी आस्था और भक्ति की अनुभूति करा रही है.

अग्नि के बीच बैठकर तपस्या

आश्रम के सेवादार गेमेश प्रजापति के अनुसार, जहां सामान्य व्यक्ति कुछ मिनट भी धूप में खड़ा नहीं रह पाता, वहीं बाबा भरत दास घंटों तक अग्नि के बीच बैठकर तपस्या करते हैं. उनके अनुसार, यह केवल एक साधना नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास, अनुशासन और आत्मसंयम का अद्भुत उदाहरण है, जिसे देखकर लोग भावविभोर हो जाते हैं.

बाबा भरत दास की तपस्या के सख्त नियम भी हैं. वे हर दिन निर्धारित समय में बिना किसी आहार या जल ग्रहण किए तप में लीन रहते हैं. बताया जाता है कि वे हर वर्ष इसी तरह प्रचंड गर्मी के बीच यह कठिन साधना करते हैं और भगवान महाकाल शिव की आराधना कर विश्व कल्याण और शांति की कामना करते हैं.

चारों ओर जलते उपलों का घेरा

तपस्या की प्रक्रिया भी बेहद खास है. बाबा सबसे पहले एक स्थान पर बैठते हैं और अपने चारों ओर उपलों (गोबर के कंडों) से घेरा बनाते हैं. इसके बाद उस घेरे में आग लगाई जाती है, जिससे सभी उपले जलने लगते हैं. धुएं और तेज गर्मी के बीच वे उसी घेरे में बैठकर अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप करते रहते हैं. यह दृश्य देखने वालों के लिए अद्भुत और अलौकिक अनुभव जैसा होता है.


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तरह की कठोर तपस्या अक्सर सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान उज्जैन में देखने को मिलती है. इस अवसर पर देशभर से संत-महात्मा यहां पहुंचते हैं और विभिन्न प्रकार की तप साधनाओं के माध्यम से भगवान की आराधना करते हैं. कोई वर्षों तक एक हाथ उठाए रखता है तो कोई एक पैर पर खड़े होकर तप करता है. ऐसे में बाबा भरत दास की यह साधना भी लोगों को गहरी आस्था और भक्ति की अनुभूति करा रही है.

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