• रवि उपाध्याय
यह माना कि डोनल्ड ट्रंप की सनक के चलते दुनिया के साथ हमारा देश भी आर्थिक संकटों के मुहाने पर खड़ा है। यह भी सच्चाई है कि हमारे देश की एक, बहुत बड़ी धन राशि ईंधन के आयात पर डॉलर के रूप में खर्च होती है। इसका असर हमारे विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। देश और दुनिया अनचाहे संकट से गुजर रही है। प्रत्येक सरकार का यह दायित्व है कि वह अपने देश की जनता को इस संकट से अवगत कराए और उससे ऐसी वस्तुओं का उपयोग करने पर संयम और मितव्ययिता बरतने की अपील करे।
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए अपील की कि पेट्रोलियम पदार्थों का संयम से उपयोग करें। उन्होंने सुझाव दिया है कि एक साल के लिए सोना खरीद से बचा जाए। क्योंकि विदेशों से सोना आयात पर विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित होता है। क्योंकि सोना आयात का भुगतान डॉलर में किया जाता है। बता दें कि हमारे देश में 99 प्रतिशत सोना विदेशों से आयात किया जाता है, जिसका भुगतान डॉलर में करना होता है। उन्होंने विदेश जाने वाले यात्रियों से अनुरोध किया कि जरूरी होने पर ही विदेश यात्राएं करें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व में चल रहे दो -दो युद्ध चल रहे हैं। इनके प्रभाव हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर भी हो रहा है। खाड़ी देशों से सहित और अन्य देशों से आयात किया जाने वाला कच्चा तेल का भाव 60- 62 डॉलर बैरल से बढ़ कर 105- 110 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर विपरीत असर पड़ा है।
देश वासियों से इस तरह की अपील करना कोई गलत भी नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि सरकार ऐसा पहला बार कर रहीं हैं। देश के आज़ाद होने के 02 साल बाद ही सन् 1949 में पहली बार ऐसी अपील हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी।इसके बाद तो सन्1962,1965, 1967,1971से लेकर आज तक संकट की घड़ी में प�
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