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“कुमार के विश्वास” के नाम पर करोड़ों का खेल...?A game worth crores in the name of “Kumar's trust”...?

फीनिक्स में “कान्हा महोत्सव” या पास बिक्री का हाई-प्रोफाइल कारोबार!

समाज का मंच… लेकिन संचालन किसके हाथ?

“द्वारका”, “वृंदावन”, “मथुरा” कोडवर्ड में बिक रहे पास, इवेंट कंपनी वेजल-ड्रेजल पर उठे सवाल

इंदौर। शहर के फीनिक्स मॉल में 30 और 31 मई को प्रस्तावित “कान्हा महोत्सव” अब धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन से ज्यादा कथित “पास कारोबार” को लेकर चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया और निजी ग्रुपों में वायरल हो रहे पोस्टरों में प्रसिद्ध कवि एवं वक्ता डॉ. कुमार विश्वास के कार्यक्रम “अपने-अपने श्याम” के लिए अलग-अलग श्रेणी के पास निर्धारित किए गए हैं।



जानकारी के मुताबिक “द्वारका” VVIP पास ₹4000, “वृंदावन” VIP पास ₹2000 और “मथुरा” Gold पास ₹1000 में उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इसके साथ “एक व्यक्ति-एक पास” और “दोनों दिन मान्य” जैसे नियम भी जारी किए गए हैं, जिससे पूरा आयोजन किसी कॉर्पोरेट टिकटेड शो जैसा नजर आ रहा है।


समाज की आड़ या कारोबारी मॉडल?


कार्यक्रम का प्रचार “श्री माहेश्वरी समाज इंदौर जिला” के नाम से किया जा रहा है, लेकिन अंदरखाने चर्चाएं इशारा कर रही हैं कि पूरा संचालन कथित रूप से इवेंट मैनेजमेंट कंपनी “वेजल-ड्रेजल” के हाथ में है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि यह धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन है तो हजारों रुपए लेकर पास क्यों बेचे जा रहे हैं? और यदि यह व्यावसायिक इवेंट है, तो समाज का नाम आगे क्यों रखा गया है?


सूत्रों के अनुसार समाज से जुड़े कुछ चेहरे कथित रूप से “कोऑर्डिनेटर” नहीं बल्कि “पास ब्रोकर” की भूमिका निभाते दिखाई दे रहे हैं। समाज के व्हाट्सएप ग्रुपों और निजी संपर्कों के जरिए पास उपलब्ध करवाने के संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।


हिसाब-किताब और अनुमति पर बड़ा सवाल


अब सबसे बड़ा सवाल आयोजन की पारदर्शिता को लेकर खड़ा हो रहा है।


क्या पास के बदले अधिकृत रसीद दी जा रही है?


क्या इस राशि का कोई वैधानिक हिसाब मौजूद है?


क्या नगर निगम, प्रशासन और मनोरंजन कर विभाग से अनुमति ली गई है?


क्या टिकट बिक्री पर लागू टैक्स जमा किया गया?


यदि यह “सहयोग राशि” है तो सीट कैटेगरी और फिक्स रेट क्यों तय किए गए?



शहर में चर्चा है कि यदि हजारों लोगों से राशि ली जा रही है तो इसका पूरा वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए।


“कुमार” के नाम पर किसका कारोबार?


सूत्रों का दावा है कि आयोजन के पीछे सक्रिय इवेंट कंपनी पर्दे के पीछे से पूरा संचालन कर रही है, जबकि सामने समाज का चेहरा रखा गया है। यही वजह है कि अब समाज के भीतर भी मतभेद की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।


एक पक्ष इसे भव्य धार्मिक आयोजन बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सवाल उठा रहा है कि आखिर “कुमार विश्वास” के नाम पर यह पूरा मॉडल किसके आर्थिक लाभ के लिए चलाया जा रहा है?


सवालों के घेरे में “कान्हा महोत्सव”


धार्मिक आयोजन या कमर्शियल शो?


₹1000 से ₹4000 तक की राशि सहयोग है या टिकट बिक्री?


पास वितरण का अधिकृत रिकॉर्ड कहां है?


क्या मनोरंजन शुल्क और निगम अनुमति ली गई?


समाज का नाम आगे और संचालन निजी कंपनी के हाथ में क्यों?


जिम्मेदार अनजान हैं तो पास कौन बेच रहा है?


आखिर “कुमार के विश्वास” के नाम पर किसका कारोबार चमक रहा है?



फिलहाल आयोजन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन आयोजकों की ओर से इन आरोपों और चर्चाओं पर कोई विस्तृत आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।

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