केरल में एलडीएफ (LDF) के 10 साल के शासन को खत्म करने के बाद कांग्रेस के भीतर जश्न के बजाय गुटबाजी का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पद के लिए तीन मुख्य दावेदार वीडी सतीसन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल मैदान में हैं। शनिवार को ये सभी नेता दिल्ली में मौजूद रहे और माना जा रहा है कि अगले 24 घंटों के भीतर अंतिम नाम की घोषणा हो जाएगी। मुख्यमंत्री पद की यह जंग अब सार्वजनिक हो गई है। तिरुवनंतपुरम से लेकर इडुक्की तक समर्थकों ने अपने-अपने नेताओं के पोस्टर और होर्डिंग्स लगा दिए हैं।
सबसे विवादित घटना तब हुई जब दिवंगत नेता ओमान चांडी और केसी वेणुगोपाल की तस्वीर वाले एक फ्लेक्स बोर्ड को फाड़ दिया गया और उस पर काला तेल डाल दिया गया। कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन और पीजे कुरियन ने इस व्यवहार की कड़ी निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दबाव की राजनीति से मुख्यमंत्री तय नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री पद के मुख्य दावेदार
वीडी सतीसन को विपक्ष के नेता के रूप में एलडीएफ के खिलाफ आक्रामक चेहरा माना गया। IUML का समर्थन उन्हें प्राप्त है।
रमेश चेन्निथला- पूर्व विपक्ष के नेता और संगठन पर मजबूत पकड़। सोनिया गांधी के करीबी माने जाते हैं। 2021 की हार उनके नेतृत्व में हुई थी।
केसी वेणुगोपाल- राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेहद भरोसेमंद हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है।
शशि थरूर- तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर का नाम भी चर्चा में है। हालांकि, उन्हें राज्य प्रशासन के बजाय राष्ट्रीय राजनीति का चेहरा माना जाता रहा है। उन्होंने शुक्रवार को खरगे से मुलाकात की, जिसे उन्होंने केरल की स्थिति पर फीडबैक साझा करना बताया।
चयन की प्रक्रिया क्या है?
कांग्रेस की परंपरा के अनुसार, तिरुवनंतपुरम में नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार हाईकमान को सौंप दिया गया है। AICC पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने विधायकों की राय लेकर अपनी रिपोर्ट मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंप दी है। शनिवार दोपहर खड़गे के आवास पर केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम बैठक हुई।
वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन ने संकेत दिया कि फैसला लेते समय केवल वरिष्ठता ही पैमाना नहीं होगी, बल्कि गठबंधन के साथियों (UDF सहयोगियों) की राय भी महत्वपूर्ण होगी। चूंकि यह एक गठबंधन सरकार है, इसलिए मुस्लिम लीग (IUML) जैसे दलों की पसंद काफी मायने रखेगी। अब सारी नजरें मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी पर हैं। पार्टी को उम्मीद है कि नाम की घोषणा के बाद केरल कांग्रेस में कोई विद्रोह नहीं होगा और पूरी पार्टी एकजुट होकर नई सरकार का स्वागत करेगी।

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