आजकल बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान और तनाव की वजह से हाई ब्लड प्रेशर (हाई बीपी) और डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ये दोनों बीमारियां केवल दिल या ब्लड शुगर तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि शरीर के कई अहम अंगों को प्रभावित कर सकती हैं। इनमें किडनी सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले अंगों में शामिल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक अनियंत्रित हाई बीपी और डायबिटीज किडनी की कार्यक्षमता को धीरे-धीरे कमजोर कर सकते हैं। कई मामलों में यह स्थिति किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है।
कैसे नुकसान पहुंचाती है डायबिटीज?
डायबिटीज में ब्लड शुगर का स्तर लगातार बढ़ा रहता है। इससे किडनी की छोटी रक्त वाहिकाएं (ब्लड वेसल्स) प्रभावित होने लगती हैं। धीरे-धीरे किडनी खून को सही तरीके से फिल्टर नहीं कर पाती। इस स्थिति को “डायबिटिक नेफ्रोपैथी” कहा जाता है।
शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ पेशाब में प्रोटीन आना, सूजन और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हाई बीपी का क्या असर पड़ता है?
हाई ब्लड प्रेशर किडनी की रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ाता है। लगातार ज्यादा दबाव रहने से किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होने लगती है। यही वजह है कि लंबे समय तक हाई बीपी रहने पर क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ सकता है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
पैरों और चेहरे पर सूजन
बार-बार या कम पेशाब आना
थकान और कमजोरी
भूख कम लगना
सांस फूलना
पेशाब में झाग या खून आना
कैसे बचाव करें?
डॉक्टरों के अनुसार हाई बीपी और डायबिटीज को कंट्रोल में रखना ही किडनी को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है।
नियमित ब्लड शुगर और बीपी जांच कराएं
कम नमक और संतुलित आहार लें
रोजाना एक्सरसाइज करें
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
पर्याप्त पानी पिएं
डॉक्टर की दवाएं समय पर लें
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डायबिटीज या हाई बीपी के मरीज नियमित जांच कराते रहें और सही लाइफस्टाइल अपनाएं, तो किडनी को गंभीर नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता है।

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