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अब दक्षिण के राज्यों पर BJP की नजर, तमिलनाडु में अपनाएगी बंगाल वाला फॉर्मूलाThe BJP Now Sets Its Sights on Southern States; Will Adopt the 'Bengal Formula' in Tamil Nadu





अरब सागर के तट से वर्ष 1980 में शुरू हुई भाजपा की राजनीतिक यात्रा 46 साल बाद गंगासागर तक पहुंच गई है। हालांकि, हिंद महासागर की सीमाई राज्यों तक पहुंचना अभी बाकी है। पार्टी का अगले एक दशक का लक्ष्य सारी समुद्री सीमाओं वाले प्रदेशों में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाना है। इसके लिए अब पार्टी अपने मिशन दक्षिण के लिए बदली हुई रणनीति पर काम करेगी। भाजपा की पहुंच से दूर रहा तेलंगाना उसका पहला लक्ष्य है। उसके बाद केरल और तमिलनाडु की व्यूह रचना पर काम होगा। कर्नाटक में उसे अगले ही चुनाव में वापसी की उम्मीद है।

साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही अमित शाह ने भाजपा की कमान संभाली थी। उन्होंने अपने पहले ही भाषण में भाजपा के पू्र्वोत्तर विस्तार और कोरोमंडल में पहुंच का विशाल रोड मैप पेश किया था। पूर्वोत्तर से कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने और प्रमुख पूर्वी राज्यों बिहार, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल में अपने मुख्यमंत्री बनाने के बाद अब वह अधूरे मिशन दक्षिण की ओर बढ़ने जा रही है।

तमिलनाडु में तैयार भाजपा की जमीन

दक्षिण के पांच राज्यों में भाजपा अभी आंध्र प्रदेश में तेलुगुदेशम के साथ गठबंधन सरकार में है। कर्नाटक में कई बार सरकार बना चुकी पार्टी को अगले चुनाव में फिर से सत्ता में आने का भरोसा है। बाकी तीन राज्यों तेलंगाना, तमिलनाडु एवं केरल उसके अगले लक्ष्य हैं। तेलंगाना में भाजपा की जमीन तैयार हो चुकी है।

केरल और तमिलनाडु ही उसके लिए सबसे मुश्किल राज्यों में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा तमिलनाडु में पश्चिम बंगाल का फॉर्मूला अपनाएगी और अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए अन्नाद्रमुक के कई प्रमुख नेताओं को अपने साथ लाएगी। यहां हाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने नागेंद्रन भी अन्नाद्रमुक से ही आए हैं।

वाम दलों की जगह लेने की तैयारी

केरल भाजपा से ज्यादा आरएसएस की मजबूती के लिए जाना जाता है। इस बार के चुनाव में भाजपा ने बदलाव वाले चुनाव में अपने लिए तीन सीट जीतकर तथा पांच सीट पर दूसरे स्थान पर रहकर अपने भावी अभियान की शुरुआत कर दी है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा वाम दलों की हार के बाद अब उसका स्थान खुद हासिल करने की तैयारी में है। राज्य में हिंदू समुदाय की सालों से पसंद रहे वाम दलों की जगह अब भाजपा लेने की तैयारी में है। ईसाई समुदाय में भी भाजपा ने अपनी पकड़ बनाई है।

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