वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता ने चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और मतदाता सूची में “हेरफेर” का आरोप लगाते हुए देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है।
भूषण ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाते हुए जानबूझकर उनके नाम हटाए गए और कुल करीब 91 लाख नाम डिलीट किए गए।
प्रशांत भूषण ने कहा कि यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा बेहद गंभीर मुद्दा है। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराए और हटाए गए मतदाताओं का पूरा डेटा सार्वजनिक करे।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाते हैं, तो इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। भूषण ने नागरिक संगठनों, विपक्षी दलों और आम लोगों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील भी की।
हालांकि चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में इस बयान के बाद बहस तेज हो गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद बन सकता है। वहीं सत्तापक्ष इन आरोपों को राजनीतिक एजेंडा बताकर खारिज कर सकता है।

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