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नीट रद्द… 22 लाख छात्रों का सपना फिर अधर में! पेपर लीक ने मेहनत पर फेरा पानीNEET cancelled... 2.2 million students' dreams once again in jeopardy! Paper leak ruins their hard work



देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 आखिरकार रद्द कर दी गई। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने दोबारा परीक्षा कराने का ऐलान तो कर दिया, लेकिन इस फैसले ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को गहरे तनाव में डाल दिया है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हर साल मेहनत करने वाले छात्र ही व्यवस्था की नाकामी की कीमत क्यों चुकाएं? करोड़ों रुपये खर्च कर कोचिंग करने वाले, गांव छोड़ शहरों में किराए के कमरों में रहने वाले और दिन-रात पढ़ाई करने वाले छात्रों के सपनों पर एक बार फिर पेपर लीक माफिया ने चोट कर दी।

जांच में सामने आया कि कथित “गेस पेपर” के 100 से ज्यादा सवाल असली परीक्षा से मेल खा रहे थे। व्हाट्सएप समूहों, फोटोकॉपी दुकानों और दलालों के जरिए सवाल परीक्षा से पहले ही घूम रहे थे। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल है।

अब सरकार और एजेंसियां कह रही हैं कि दोबारा शुल्क नहीं लगेगा, फीस वापस होगी और पुनर्परीक्षा कराई जाएगी। लेकिन क्या छात्रों का मानसिक दबाव, एक साल की मेहनत और टूट चुका भरोसा भी वापस किया जा सकेगा?

सबसे शर्मनाक बात यह है कि देश में हर साल पेपर लीक पर बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, मगर माफिया हर बार सिस्टम से तेज निकल जाता है। गिरफ्तारियां होती हैं, जांच बैठती है, बयान आते हैं, लेकिन अगली परीक्षा में फिर वही खेल शुरू हो जाता है।

आज जरूरत सिर्फ पुनर्परीक्षा की नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को खत्म करने की है जो मेहनती छात्रों का भविष्य बेचकर करोड़ों कमा रहा है। वरना हर साल छात्र पढ़ाई कम और सिस्टम पर भरोसा बचाने की लड़ाई ज्यादा लड़ते रहेंगे।

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