बेंगलुरु से हज यात्रा 2026 का शुभारंभ हुआ, जहां मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने हाजियों से अपनी नमाज के साथ-साथ राज्य की भलाई और शांति के लिए दुआ करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हज इस्लाम के पांच प्रमुख स्तंभों में से एक है और हर सक्षम मुसलमान के लिए जीवन में कम से कम एक बार इस यात्रा को करना महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा आत्मिक शुद्धि और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक होती है।
उन्होंने कुरान के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी निर्दोष व्यक्ति की हत्या पूरी इंसानियत की हत्या के समान है, जबकि किसी की जान बचाना पूरी मानवता को बचाने जैसा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी धर्म हिंसा नहीं सिखाता और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।
मुख्यमंत्री ने हाजियों से ईमानदारी और साफ नीयत के साथ यात्रा करने की अपील की और समाज में आपसी सम्मान, भाईचारे और सहनशीलता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संविधान के मूल सिद्धांत—भाईचारा, समानता और मेलजोल—हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं।
इस अवसर पर जुल्फिखार अहमद खान ने जानकारी दी कि इस वर्ष कर्नाटक से कुल 11,680 हाजी हज यात्रा पर जाएंगे। यात्रियों के लिए तीन प्रस्थान केंद्र बनाए गए हैं—बेंगलुरु, उत्तर कर्नाटक के लिए हैदराबाद और बेलगावी तथा हुबली-धारवाड़ क्षेत्र के लिए मुंबई।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रति यात्री लगभग 3 लाख 47 हजार रुपये खर्च आएगा, जिसमें ईंधन लागत बढ़ने के कारण करीब 10 हजार रुपये की अतिरिक्त वृद्धि हुई है।
हज समिति के नए नियमों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस वर्ष 12 से 16 वर्ष आयु के बच्चों को हज यात्रा की अनुमति नहीं दी गई है। सऊदी प्रशासन द्वारा इस आयु वर्ग के कई बच्चों के वीजा भी रद्द किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार अल्पसंख्यक शिक्षा और कल्याण को प्राथमिकता दे रही है। वर्ष 2026–27 के बजट में हज यात्रियों और उनके परिजनों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु कलबुर्गी और हुबली में हज भवन बनाए जाएंगे।
इस कार्यक्रम के साथ कर्नाटक से इस वर्ष की हज यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो गई, जिसमें बड़ी संख्या में अधिकारी और यात्री उपस्थित रहे।

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