मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित मानहानि मामले में दिग्विजय सिंह और उमा भारती के बीच 21 साल पुराना विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए स्टेटस रिपोर्ट तलब कर ली है।
दरअसल, यह मामला वर्ष 2003 के आसपास का है, जब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच मानहानि का विवाद खड़ा हुआ था। निचली अदालत से होते हुए मामला हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन 2017 से यह केस लंबित पड़ा है। बीते 7 वर्षों में कई बार सुनवाई की तारीख लगी, मगर दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा बार-बार समय मांगे जाने के कारण बहस शुरू ही नहीं हो सकी।
हाईकोर्ट ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि न्यायिक प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने संबंधित पक्षों और अधिकारियों से मामले की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर इतनी लंबी देरी क्यों हुई और अब तक क्या प्रगति हुई है।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले में दोनों ही नेता मध्य प्रदेश की सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, ऐसे में इसका लंबा लंबित रहना भी लगातार चर्चा का विषय बना रहा। अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि वर्षों से अटका यह मामला जल्द अंतिम बहस और निर्णय की ओर बढ़ेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोर्ट सख्त रुख बनाए रखता है तो आने वाली सुनवाई में बहस शुरू होने की संभावना है, जिससे इस लंबे समय से चल रहे विवाद का पटाक्षेप संभव हो

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