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शाह ने केरल की संभाली कमान, भाजपा ने दिया नारा- जो कभी नहीं बदला है, वह अब बदलेगाShah took charge of the campaign in Kerala, and the BJP gave the slogan: "What has never changed before, will change now."

 

दक्षिण भारत का केरल राज्य, जो अब तक भारतीय जनता पार्टी की पहुंच से सबसे दूर माना जाता रहा है, अब पार्टी की भविष्य की रणनीति का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा यहां एक बड़ी राजनीतिक छलांग लगाने की योजना बना रही है, जिसकी कमान स्वयं गृह मंत्री अमित शाह ने संभाल रखी है। पार्टी ने इस बार एक बेहद आक्रामक और रणनीतिक नारा दिया है— जो कभी नहीं बदला है, वह अब बदलेगा। इस नारे के माध्यम से भाजपा केरल की पारंपरिक द्विध्रुवीय राजनीति को तोड़कर एक मजबूत विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने का प्रयास कर रही है।


हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों ने भाजपा के भीतर भारी उत्साह का संचार किया है। राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 101 वार्डों में से 50 पर जीत दर्ज कर भाजपा ने न केवल इतिहास रचा, बल्कि पहली बार अपना मेयर बनाने में भी सफलता हासिल की। इसके अलावा, दो अन्य नगर पालिकाओं में मिली जीत ने पार्टी को यह विश्वास दिलाया है कि शहरी मतदाता अब उसके विकास के दावों को गंभीरता से ले रहे हैं। अमित शाह ने अपने हालिया केरल दौरे के दौरान कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करते हुए त्रिपुरा और मणिपुर जैसे राज्यों का उदाहरण दिया, जहां भाजपा ने शून्य से शिखर तक का सफर तय कर सरकारें बनाईं। उन्होंने याद दिलाया कि 1984 में लोकसभा में मात्र दो सीटों वाली पार्टी आज लगातार तीन बार से पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में है, इसलिए केरल में भी बदलाव संभव है।

भाजपा का यह आत्मविश्वास आंकड़ों पर भी आधारित है। केरल में एनडीए का वोट शेयर पिछले दो दशकों में निरंतर बढ़ा है। वर्ष 2001 में भाजपा का वोट शेयर मात्र तीन प्रतिशत था, जो 2021 के विधानसभा चुनाव तक बढ़कर 12 से 15 प्रतिशत के बीच पहुंच गया। लोकसभा चुनावों में भी पार्टी का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर गया है और 2024 के चुनाव में उसे लगभग 20 प्रतिशत वोट शेयर के साथ एक सीट पर जीत भी मिली। स्थानीय निकाय चुनावों में सभी छह नगर निगमों में गठबंधन ने 23 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए हैं, जबकि 79 ग्राम पंचायतों में पार्टी दूसरे स्थान पर रही है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती पैठ को दर्शाता है।

रणनीतिक रूप से भाजपा यहां विकास के साथ-साथ सामाजिक और भावनात्मक मुद्दों को भी हवा दे रही है। सबरीमाला जैसे मुद्दों ने हिंदू मतदाताओं के एक बड़े वर्ग, विशेषकर दक्षिणी केरल में, पार्टी के प्रति स्थायी जुड़ाव पैदा किया है। इसके अतिरिक्त, पार्टी का ध्यान राज्य के प्रभावशाली इझवा ओबीसी समुदाय पर है, जो हिंदू आबादी का 26 प्रतिशत हिस्सा है और पारंपरिक रूप से वामपंथ का समर्थक रहा है। के. सुरेंद्रन और वी. मुरलीधरन जैसे ओबीसी नेताओं के माध्यम से भाजपा इस वर्ग में अपनी पैठ मजबूत कर रही है। वर्तमान में वामपंथी दलों के खिलाफ दिख रहे सत्ता विरोधी माहौल को भाजपा अपने पक्ष में भुनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

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