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सच की उड़ान को रोक नहीं सकते काग़ज़ी फैसले Paper decisions cannot stop the flight of truth.



अजय कुमार बियानी

इंजीनियर 

किसी और इंसान का नज़रिया हमारा भविष्य तय नहीं कर सकता। यह वाक्य केवल आत्मबल बढ़ाने का संदेश नहीं, बल्कि आज के सामूहिक जीवन की सच्चाई है। विशेषकर तब, जब ईमानदारी से काम करने वालों के सामने ऐसे निर्णय खड़े कर दिए जाएँ, जिनका न तो वैधानिक आधार हो और न ही नैतिक। विनम्र रहना हमारी संस्कृति है, पर अपनी कीमत से अनजान रहना कायरता है—यह बात अब समाज को समझनी होगी।

प्रकृति ने हमें बाज और कौवे की कथा के माध्यम से बहुत गहरी सीख दी है। बाज शक्तिशाली है, पर वह अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं करता। वह चुपचाप ऊँचाई की ओर उड़ता है। दूसरी ओर कौवा शोर करता है, चोंच मारता है और यह भ्रम पाल लेता है कि सामने वाला कमजोर है। पर बाज न तो प्रतिकार में समय गंवाता है, न ही अपने मार्ग से भटकता है। वह केवल ऊँचा उड़ता है, और वही ऊँचाई कौवे के पतन का कारण बन जाती है।

आज यही स्थिति कई आवासीय परिसरों में देखने को मिल रही है। विधिसम्मत रूप से चुने गए, अधिकृत सदस्यों की जिम्मेदारी और अधिकार स्पष्ट होते हैं। परंतु दुर्भाग्य से, कुछ स्थानों पर तथाकथित सलाहकार समूह उभर आए हैं, जिनका न कोई संवैधानिक आधार है और न ही सामूहिक स्वीकृति। ये समूह अपने आप को निर्णयकर्ता मान बैठते हैं और ऐसे फैसले ले लेते हैं, जो न केवल नियमों के विपरीत होते हैं, बल्कि ईमानदार और जिम्मेदार सदस्यों का मनोबल भी तोड़ते हैं।

समस्या यह नहीं है कि सुझाव दिए जा रहे हैं; समस्या यह है कि सुझाव और आदेश की रेखा जानबूझकर मिटाई जा रही है। जब अधिकारहीन लोग अधिकारपूर्ण भाषा में निर्णय सुनाने लगें, तब भ्रम, असंतोष और अविश्वास पैदा होता है। ईमानदार सदस्य, जो नियमों के अनुसार काम करना चाहते हैं, स्वयं को अकेला और हतोत्साहित महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि सच्चाई और प्रक्रिया का कोई मूल्य नहीं बचा।

यह स्थिति केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक पतन की ओर इशारा करती है। जब गलत निर्णयों को शोर और दबाव के बल पर थोप दिया जाता है, तब व्यवस्था खोखली होने लगती है। आज अगर नियमों की अनदेखी हो रही है, तो कल जवाबदेही भी समाप्त हो जाएगी। और जब जवाबदेही नहीं रहती, तब अराजकता जन्म लेती है।

यह समझना आवश्यक है कि अधिकार जिम्मेदारी से आते हैं, और जिम्मेदारी नियमों से बंधी होती है। जो लोग बिना अधिकृत पद के निर्णय लेते हैं, वे अनजाने में ही सही, पर व्यवस्था को कमजोर करते हैं। ऐसे फैसले तात्कालिक रूप से कुछ लोगों को संतुष्ट कर सकते हैं, पर दीर्घकाल में पूरे समुदाय को नुकसान पहुँचाते हैं।

ईमानदार सदस्य वही बाज हैं, जो बिना शोर किए, बिना व्यक्तिगत आरोपों में उलझे, अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते हैं। वे जानते हैं कि सच्चाई की उड़ान धीमी हो सकती है, पर उसकी दिशा सही होती है। उन्हें चोंच मारने वाले कुछ लोग अस्थायी रूप से ध्यान आकर्षित कर सकते हैं, पर ऊँचाई पर वही टिकेगा, जिसमें सहनशक्ति और अनुशासन होगा।

आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज शोर और दबाव के बजाय नियम, पारदर्शिता और सामूहिक सहमति को महत्व दे। अधिकृत सदस्यों की भूमिका को कमजोर करना, वास्तव में पूरी व्यवस्था को कमजोर करना है। ईमानदारी से काम करने वालों को हतोत्साहित करना, भविष्य की नींव को दरकाने जैसा है।

समय अंततः सब स्पष्ट कर देता है। काग़ज़ी फैसले, अनधिकृत निर्देश और भ्रमित करने वाली सलाह अधिक समय तक टिक नहीं पाती। गिरावट उनका भाग्य बनती है, जो नियमों से ऊपर स्वयं को मान बैठते हैं। और जो शांतिपूर्वक, नियमों के साथ, अपने कर्तव्य निभाते रहते हैं—उनकी उड़ान जारी रहती है।

आकाश बड़ा है, पर हर शोर करने वाला उसमें टिक नहीं पाता। टिकता वही है, जो ऊँचाई का भार सह सके। बाज की उड़ान चल रही है, और चलती रहेगी।

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