इंदौर: भागीरथपुरा की तरह शहर की अन्य कॉलोनियों में भी लोग दूषित जहरीला पानी पीने को मजबूर है। नईदुनिया ने मंगलवार को शहर में तीन कॉलोनियों में सुबह व दोपहर नर्मदा पेयजलों के रहवासी क्षेत्रों में पहुंचने पर विशेषज्ञों के साथ पानी की (टीडीएस) कठोरता मापने वाले यंत्र व क्लोरोस्कोप में माध्यम से पानी में क्लोरीन की मात्रा जांच की, जिससे यह पता चल सके कि पानी में बैक्टीरिया को मारने की कितनी क्षमता है।
मालवीय नगर, चंद्रभागा, जबरन कॉलोनी इन तीन स्थानों पर नर्मदा पेयजल वितरण के दौरान ही दूषित पानी मिला। वहीं नईदुनिया की जांच में पलसीकर कॉलोनी के घरों में वितरित जल की गुणवत्ता बेहतर मिली। इंदौर निगम के जो अफसर दूषित पानी की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं, जबरन कॉलोनी में उन्हीं निगम के अफसरों के सामने नर्मदा पेयजल लाइन के सीवेरज का काला, बदबूदार, दूषित पानी उगला।
सिर्फ ये तीन इलाके ही नहीं शहर के अधिकांश इलाकों में नर्मदा पेयजल उपयोग करने वाले रहवासियों की शिकायत है कि पेयजल सप्लाय की शुरुआत में नलों में दो से 15 मिनट तक पहले दूषित गंदा पानी आता है, जिससे यह निश्चित है कि शहर की पाइप लाइन में लीकेज है। गंदा पानी लोग सड़कों पर बहा देते है। जब पानी पारदर्शी आने लगता है तो वो उसका पीने के लिए उपयोग करते है।
लोगों यह भी नहीं मालूम की वह पानी दूषित या साफ है। लोग पानी के रंग के आधार पर उसे सुरक्षित मान रहे है, यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
पानी की टंकी से 500 मीटर दूर पहुंचते ही रहवासी क्षेत्र में दूषित पानी
[मालवीय नगर, कृष्णबाग कालोनी, समय : 7.50 बजे (वार्ड 30, जोन 8)]
मालवीय नगर में सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए अवैध निर्माण तोड़ने साथ सड़क निर्माण किया जाना है। यहां पुरानी नर्मदा पेयजल लाइनें और ड्रेनेज लाइन के चेम्बर टूट गए हैं। बर्फानी धाम पानी की टंकी में नर्मदा जल सप्लाई के पूर्व पानी में टीडीएस 137 मिलीग्रा प्रति लीटर मिला। वहीं टंकी से सप्लाई शुरु करने के दौरान 500 मीटर पहुंचने पर ही यह पानी दूषित हो गया।

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