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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) इन दिनों सियासी और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में है। केंद्र सरकार ने हाल ही में योजना का नाम बदलकर विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन–ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) कर दिया है। इस बदलाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
इसी बीच प्रदेश में मनरेगा की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। प्रदेश के सिर्फ एक जिले कवर्धा से मनरेगा में करीब 25 लाख रुपये की भ्रष्टाचार का राजफाश हुआ है।
इस तरह मामला हुआ उजागर
यह मामला तब उजागर हुआ, जब केंद्र सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा कार्यों की वास्तविक स्थिति परखने के लिए देश के 25 राज्यों के 55 जिलों में औचक जांच कराई। इसमें प्रदेश से कवर्धा जिले को शामिल किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, जल संसाधन विभाग से जुड़े कुल तीन प्रकरणों में 19.34 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई। इनमें से नौ लाख, 52 हजार रुपये की राशि की वसूली की जा चुकी है, जबकि शेष राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है।
वहीं, पंचायत स्तर पर कराए गए कार्यों में तीन लाख, 92 हजार रुपये की अनियमितता सामने आई, जिसकी पूरी राशि वसूल कर ली गई है। जानकारों का कहना है कि यदि प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा कार्यों का गहन ऑडिट कराया जाए, तो भ्रष्टाचार की वास्तविक तस्वीर इससे कहीं अधिक भयावह हो सकती है।
राजनांदगांव और सरगुजा में कराई गई जांच
अधिकारियों का दावा है कि विगत छह से आठ माह के मध्य राजनांदगांव और सरगुजा जिले में ऑडिट कराई गई है। दोनों जिलों से कोई अनियमितता नहीं पाई गई है। दोनों जिलों की रिपोर्ट केंद्रीय पंचायत मंत्रालय को भेजी गई है। मंत्रालय की ओर से दोनों जिलों में मनरेगा के तहत किए गए कार्यों की प्रशंसा की गई है।

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